ट्रंप के ‘संकटमोचक’ : कुश्नर और विटकॉफ के कंधों पर यूक्रेन और ईरान वार्ता का भार

वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक मंच पर जारी दो सबसे जटिल संघर्षों—यूक्रेन युद्ध और ईरान के साथ बढ़ते तनाव—को सुलझाने के लिए अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगियों पर दांव लगाया है। राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुश्नर और उनके करीबी मित्र स्टीव विटकॉफ को इन महत्वपूर्ण कूटनीतिक वार्ताओं की कमान सौंपी गई है। हाल ही में स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इन दोनों प्रतिनिधियों ने मैराथन बैठकों के जरिए शांति बहाली की संभावनाओं को टटोला।
जिनेवा में कूटनीति की बिसात
जिनेवा प्रवास के दौरान कुश्नर और विटकॉफ का कार्यक्रम काफी सघन रहा। उन्होंने अपनी कूटनीतिक सक्रियता को दो मोर्चों पर केंद्रित रखा:
ईरान के साथ संवाद: ओमान के राजदूत के आवास पर ईरानी अधिकारियों के साथ उनकी बैठक हुई। इसका मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी सहमति पर पहुँचना और संभावित सैन्य टकराव को टालना था।
यूक्रेन-रूस विवाद: इसके तुरंत बाद, दोनों ने इंटरकॉन्टिनेंटल और फोर सीजन्स होटल में रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकातें कीं। पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुके इस युद्ध को समाप्त करने के लिए यह एक बड़ी पहल मानी जा रही है।
गाजा शांति में भी सक्रिय भूमिका
इन दोनों प्रतिनिधियों का प्रभाव केवल यूरोप या ईरान तक सीमित नहीं है। पिछले सप्ताह ही उन्होंने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में शिरकत की, जो गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम की शर्तों को लागू करने के लिए बनाई गई है। यह उनके बढ़ते वैश्विक कद और ट्रंप प्रशासन में उनके महत्व को दर्शाता है।
ट्रंप की रणनीति: परंपरा से हटकर कूटनीति
राष्ट्रपति ट्रंप पारंपरिक सरकारी तंत्र और नौकरशाही के बजाय अपने निजी विश्वसनीय सहयोगियों के माध्यम से विदेश नीति संचालित करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने इस कार्यशैली पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है।
“प्रत्येक अंतरराष्ट्रीय वार्ता विवरणों और पेचीदगियों का एक गहरा सागर होती है। दो व्यक्तियों के लिए इतने बड़े संकटों को एक साथ संभालना एक असाधारण चुनौती है।”
— आरोन डेविड मिलर, पूर्व वार्ताकार
व्हाइट हाउस ने इन आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा है कि कुश्नर और विटकॉफ का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड और उनका व्यावसायिक कौशल इन जटिल वार्ताओं को सफल बनाने में सक्षम है।
व्यावसायिक हितों पर उठते सवाल
इन नियुक्तियों को लेकर आलोचना भी हो रही है, जिसका मुख्य कारण कुश्नर और विटकॉफ के निजी व्यावसायिक हित हैं।
कुश्नर की फर्म ‘एफिनिटी पार्टनर्स’ का मध्य पूर्व के निवेश फंड्स के साथ गहरा जुड़ाव है।
विटकॉफ की क्रिप्टो कंपनी ‘वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल’ भी खाड़ी देशों में सक्रिय है।
रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस जैसे आलोचकों का मानना है कि सीनेट की मंजूरी या औपचारिक सरकारी निगरानी के बिना इतनी संवेदनशील वार्ताओं का जिम्मा संभालना चिंताजनक हो सकता है।
यूक्रेन की सकारात्मक प्रतिक्रिया
तमाम विवादों के बीच यूक्रेन ने इस पहल का स्वागत किया है। यूक्रेन की राजदूत ओल्गा स्टेफनिशिना ने कहा कि वे इन प्रतिनिधियों के साथ काम करके संतुष्ट हैं क्योंकि उनकी राष्ट्रपति ट्रंप तक सीधी पहुंच है। उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च की शुरुआत में होने वाली बैठकों से जेलेंस्की और पुतिन के बीच सीधी वार्ता का रास्ता खुल सकता है।
















