भारत-इजरायल संबंधों में नया अध्याय : पीएम मोदी ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित

तेल अवीव (एजेंसी)। भारत और इजरायल के बीच बढ़ते रणनीतिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई मिली है। इजरायल यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां की संसद (नेसेट) के सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से अलंकृत किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने में उनके असाधारण विजन और प्रयासों को मान्यता देता है।
दोस्ती और साझा मूल्यों का सम्मान
इस गौरवपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने विनम्रता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पदक केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और भारत-इजरायल की अटूट मित्रता का प्रतीक है। सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए उन्होंने लिखा:
“यह सम्मान हमारे देशों के उन साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और लक्ष्यों को दर्शाता है, जो हमें प्रगति के पथ पर एक साथ लाते हैं। मैं इसे पूरे भारत की ओर से स्वीकार करता हूँ।”
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पदक प्रधानमंत्री के उस दृढ़ संकल्प का प्रमाण है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में भारत और इजरायल के रिश्तों को एक नई दिशा दी है।
सभ्यता और दर्शन का मिलन
इजरायली संसद ‘नेसेट’ को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने दोनों देशों की प्राचीन सभ्यताओं के बीच दार्शनिक समानता पर जोर दिया। उन्होंने दो प्रमुख सिद्धांतों का उल्लेख किया:
टिक्कुन ओलम (इजरायल): दुनिया को बेहतर बनाने और संवारने का विचार।
वसुधैव कुटुंबकम (भारत): संपूर्ण विश्व को एक परिवार मानने की अवधारणा।
उन्होंने कहा कि ये दोनों विचार हमें सीमाओं से ऊपर उठकर मानवता के प्रति हमारी जिम्मेदारी का अहसास कराते हैं।
आर्थिक शक्ति और भविष्य का सहयोग
प्रधानमंत्री ने इजरायली सांसदों को भारत की आर्थिक विकास यात्रा से भी अवगत कराया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत जल्द ही दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होगा। द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के लिए उन्होंने कुछ मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया:
संसदीय सहयोग: भारतीय संसद में ‘इजरायल पार्लियामेंट्री फॉरेन ग्रुप’ के गठन की घोषणा की गई ताकि दोनों देशों के जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद बढ़े।
आर्थिक निवेश: व्यापार विस्तार और बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) में संयुक्त निवेश को बढ़ावा देना।
साझा भविष्य: नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में मिलकर काम करना।
पीएम मोदी ने इजरायली सांसदों को भारत आने का निमंत्रण देते हुए उम्मीद जताई कि भविष्य में दोनों देशों के बीच सहयोग के नए द्वार खुलेंगे।
















