छत्तीसगढ़

शिक्षा : आजीविका का साधन ही नहीं, समाज कल्याण का मार्ग है : राज्यपाल रमेन डेका

रायपुर। एमिटी विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ के चौथे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षा का असली लक्ष्य केवल नौकरी पाना नहीं, बल्कि ज्ञान और विवेक के माध्यम से समाज का सर्वांगीण उत्थान करना है।

शिक्षा और व्यक्तिगत सुधार

राज्यपाल ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित इस गरिमामयी समारोह में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परिवर्तन ही जीवन का सत्य है। शिक्षा हमें सकारात्मकता की ओर ले जाती है। उन्होंने भगवद गीता का उदाहरण देते हुए कहा कि मनुष्य को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए, क्योंकि यही हमें सही और गलत के बीच फर्क करना सिखाती है।

सफलता की परिभाषा: यदि हम अपनी शिक्षा से समाज के वंचित वर्गों का जीवन स्तर सुधार सकें, तभी हमारा मानव जीवन सार्थक माना जाएगा।

समग्र दृष्टिकोण: शिक्षा को केवल तकनीकी कौशल तक सीमित न रखकर इसे जीवन जीने की कला और राष्ट्र निर्माण के योगदान के रूप में देखना चाहिए।

नई शिक्षा नीति और करियर

राज्यपाल ने नई शिक्षा नीति (NEP) की सराहना करते हुए कहा कि अब शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं है।

पैशन पर जोर: अक्सर करियर की अंधी दौड़ में लोग अपनी पसंद और जुनून को पीछे छोड़ देते हैं।

उद्देश्य: जीवन का लक्ष्य केवल धन अर्जित करना नहीं, बल्कि आत्म-संतुष्टि और खुशी प्राप्त करना होना चाहिए।

मेधावी छात्रों का सम्मान

दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 816 विद्यार्थियों को स्नातक, परास्नातक और डॉक्टरेट की उपाधियाँ प्रदान की गईं।

प्रमुख सम्मान:

पुरस्कार का नाम | विवरण |

मानद डॉक्टरेट (Honoris Causa) | मंसी मदन त्रिपाठी (अध्यक्ष, शेल इंडिया) |
गोल्ड मेडल | 20 विद्यार्थियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन हेतु |
श्री बलजीत शास्त्री पुरस्कार | 08 प्रतिभावान छात्रों को |
डॉ. अशोक के. चौहान पुरस्कार | 31 छात्रों को |
बेस्ट ऑल-राउंडर ट्रॉफी | सोनल धोमने (बी.टेक. सीएसई) |

विकसित भारत 2047 का लक्ष्य

विश्वविद्यालय के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. अशोक के. चौहान ने युवाओं से ‘विकसित भारत 2047’ के सपने को साकार करने में योगदान देने की अपील की। वहीं, चेयरमैन डॉ. असीम चौहान ने कहा कि एमिटी का उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों और तकनीकी दक्षता से लैस करना है।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार, शिक्षकगण, अभिभावक और भारी संख्या में छात्र उपस्थित थे।

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