छत्तीसगढ़ में ‘हर गरीब को पक्का मकान ‘: साय सरकार ने जिलों को भेजे ₹2677 करोड़ से अधिक, निर्माण कार्यों में आएगी तेजी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) को एक नया विस्तार मिला है। चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में ग्रामीण इलाकों में मकानों के निर्माण को गति देने के लिए राज्य सरकार ने सभी जिलों को 2677.15 करोड़ रुपए का भारी-भरकम फंड जारी कर दिया है। इस बजट में केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा शामिल है, जिसे पारदर्शिता बनाए रखने और समय पर काम पूरा करने के लिए सीधे एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) पोर्टल के जरिए जिलों के खातों में ट्रांसफर किया गया है।
सम्मान और सुरक्षा की मजबूत नींव: मुख्यमंत्री
इस बड़ी पहल पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “हर गरीब को पक्का घर” देने के सपने को छत्तीसगढ़ में पूरी ताकत से जमीन पर उतारा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि सूबे का कोई भी जरूरतमंद परिवार कच्चे मकान में रहने को मजबूर न रहे। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि एक पक्का मकान सिर्फ ईंट-गारे की दीवारें नहीं होता, बल्कि यह गरीब परिवार को समाज में सम्मान, सुरक्षा और एक बेहतर कल का भरोसा देता है।
रिकॉर्ड रफ्तार से बन रहे हैं घर
सूबे में आवास निर्माण की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्य में हर दिन औसतन 1600 से ज्यादा पक्के मकान बनकर तैयार हो रहे हैं। बीते ढाई सालों में छत्तीसगढ़ सरकार 10.60 लाख से अधिक परिवारों का गृह-प्रवेश करा चुकी है। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 6 लाख से ज्यादा घर बनाकर छत्तीसगढ़ इस योजना को लागू करने में देश के टॉप राज्यों में शुमार हो गया है। मुख्यमंत्री ने इसे महज एक सरकारी आंकड़ा न मानकर लाखों परिवारों के स्वाभिमान की जीत बताया है।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अमले को सख्त हिदायत दी है कि इस पैसे का इस्तेमाल पूरी तरह से नियमों के तहत हो और बिना किसी देरी के पात्र परिवारों के घरों का निर्माण पूरा कराया जाए।
लखपति दीदी और सामाजिक बदलाव का जरिया
यह योजना केवल सिर पर छत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बदल रही है। निर्माण सामग्री की सप्लाई में जुड़कर राज्य की महिला स्व-सहायता समूह (SHGs) आत्मनिर्भर हो रही हैं। इस योजना की बदौलत प्रदेश की 10 हजार से ज्यादा महिलाएं अब ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण समाज में बदलाव का एक बड़ा जरिया बनकर उभरा है।
मुख्यधारा में लौट रहे नक्सल प्रभावित परिवार
छत्तीसगढ़ सरकार एक और संवेदनशील मोर्चे पर काम कर रही है। आत्मसमर्पण करने वाले पूर्व नक्सलियों और नक्सल हिंसा से पीड़ित परिवारों को भी इस योजना के तहत पक्के मकान दिए जा रहे हैं। इसका मकसद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके मन में सुरक्षा व विश्वास का भाव पैदा करना है।
जल संरक्षण का नवाचार और सीधे शिकायत की सुविधा
इस योजना के तहत छत्तीसगढ़ में कुछ बेहतरीन प्रयोग भी देखने को मिल रहे हैं:
रेन वाटर हार्वेस्टिंग: पानी की किल्लत से निपटने के लिए राज्य के 1.5 लाख से ज्यादा नए मकानों में जल संचयन (Rain Water Harvesting) सिस्टम लगाया गया है।
पारदर्शिता के लिए QR Code: योजना में किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड लगाए गए हैं।
टोल-फ्री हेल्पलाइन: अगर किसी हितग्राही को कोई समस्या या शिकायत है, तो वे सीधे टोल-फ्री नंबर 1800-233-1290 पर कॉल कर अपनी बात रख सकते हैं।
मुख्यमंत्री साय ने अंत में दोहराया कि उनकी सरकार पूरी संवेदनशीलता और सुशासन के साथ समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लिए संकल्पित है।
















