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पंजाब निकाय चुनाव : ‘आप’ की बंपर जीत, सीएम मान बोले- 2027 का ट्रेलर रिलीज़

चंडीगढ़ (एजेंसी)। पंजाब के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए बड़ी जीत दर्ज की है। राज्य के कुल 8 नगर निगमों में से 5 पर ‘आप’ ने अपना परचम लहराया है। इस शानदार कामयाबी से उत्साहित मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इसे साल 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव का ‘ट्रेलर’ बताया है। दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और भाजपा को भी कुछ चुनिंदा इलाकों में बड़ी सफलता हाथ लगी है। नतीजों के बाद जहाँ ‘आप’ खेमे में जश्न का माहौल है, वहीं विपक्ष ने मतों की गिनती में धांधली के आरोप लगाने शुरू कर दिए हैं।

चुनावी आंकड़े: किसे मिली कितनी सीटें?

पंजाब में 8 नगर निगमों, 75 नगर काउंसिलों और 20 नगर कमेटियों के लिए मतदान हुआ था। नगर निगमों के प्रदर्शन पर नज़र डालें तो:

आम आदमी पार्टी (AAP): मोहाली, बरनाला, बटाला, मोगा और बठिंडा सहित 5 निगमों पर कब्ज़ा किया। पार्टी ने कुल 1,977 वार्डों में से 954 सीटों पर जीत हासिल की है। इसके अलावा 75 में से करीब 45 नगर काउंसिलों में भी ‘आप’ का दबदबा रहा।

कांग्रेस: कपूरथला नगर निगम में शानदार वापसी की। यहाँ 50 में से 31 वार्ड जीतकर कांग्रेस ने ‘आप’ को करारा झटका दिया। कुल मिलाकर कांग्रेस 390 वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही।

भाजपा: अबोहर नगर निगम में पूर्ण बहुमत हासिल किया, जबकि पठानकोट में सबसे बड़े दल के रूप में उभरी। भाजपा को कुल 170 वार्डों में जीत मिली।

अन्य: निर्दलीय उम्मीदवारों ने 251 और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने 191 वार्डों पर जीत दर्ज की।

केजरीवाल और मान का विपक्ष पर तीखा हमला

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन नतीजों को सरकार के विकास कार्यों पर जनता की मुहर बताया है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब के लोगों ने दबाव की राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है।

वहीं, ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा को ‘ईडी (ED) की पार्टी’ बताते हुए कहा:

“पिछले कुछ समय से केंद्रीय एजेंसियों के दम पर पंजाब के छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और हिंदू कारोबारियों को डराने की कोशिश की जा रही थी। जनता ने अपने वोट की ताकत से इसका करारा जवाब दिया है।”

केजरीवाल ने व्यापारियों को आगाह करते हुए यह भी कहा कि इस हार के बाद आने वाले दिनों में छापों की कार्रवाई बढ़ सकती है, लेकिन राज्य सरकार हर मोड़ पर उनके साथ खड़ी है। उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें ‘आप’ को सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों की पार्टी बताया जाता था। केजरीवाल ने कहा कि इन नतीजों ने साबित कर दिया है कि शहरों में भी पार्टी की पकड़ उतनी ही मजबूत है।

विशेषज्ञ की राय: क्या निकाय चुनाव बनते हैं विधानसभा का आधार?

राजनीतिक विश्लेषक इन नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव का सटीक पैमाना मानने से इनकार कर रहे हैं। राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रोफेसर कुलदीप सिंह के अनुसार, स्थानीय चुनाव और राज्य के मुख्य चुनाव के मिजाज में बड़ा अंतर होता है। उन्होंने पिछले रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए समझाया:

2021 बनाम 2022: साल 2021 के निकाय चुनावों में कांग्रेस ने एकतरफा जीत हासिल की थी, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में उसे करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।

2015 बनाम 2017: साल 2015 में अकाली दल ने स्थानीय चुनावों में बाजी मारी थी, मगर 2017 के विधानसभा चुनाव में सत्ता उनके हाथ से निकल गई।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इन नतीजों ने भाजपा को यह साफ संदेश दिया है कि अकाली दल के साथ गठबंधन के बिना पंजाब में उसकी राह आसान नहीं है।

विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

नतीजे घोषित होने के बाद विपक्षी दलों ने सत्ताधारी दल पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी का दावा किया। वहीं कांग्रेस ने भी मतगणना पर सवाल खड़े किए हैं, विशेषकर गिद्दरबाहा सीट पर, जहाँ 19 में से 17 वार्डों में ‘आप’ को विजेता घोषित किया गया है। तमाम आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच, फिलहाल पंजाब के शहरी धरातल पर आम आदमी पार्टी खुद को साबित करने में सफल रही है।

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