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मिडल-ईस्ट संकट : $80 के पार पहुँचा कच्चा तेल, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ता दबाव

नई दिल्ली (एजेंसी)। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है। अमेरिका और इजरायल के सैन्य कदमों के जवाब में ईरान द्वारा खाड़ी देशों (कतर, सऊदी अरब और यूएई) के आसपास किए गए हमलों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।

कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ बढ़त

पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल के दाम उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से ऊपर चढ़े हैं:

ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): शुक्रवार को $72 पर रहने के बाद, इसमें अचानक 12% की वृद्धि हुई और यह $80 प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। 2026 की शुरुआत से अब तक इसमें लगभग 19% की तेजी आ चुकी है।

WTI क्रूड: अमेरिकी मानक तेल भी 8% की बढ़त के साथ $70 प्रति बैरल के पार निकल गया है।

आपूर्ति (Supply) पर संकट के बादल

ईरान वैश्विक तेल बाजार का एक प्रमुख खिलाड़ी है, जिससे जुड़ी ये चुनौतियां सामने आ रही हैं:

उत्पादन क्षमता: ईरान OPEC+ का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो हर दिन लगभग 33 लाख बैरल तेल पैदा करता है। यह दुनिया के कुल उत्पादन का 3% हिस्सा है।

रिफाइनरी पर खतरा: ईरान की सबसे बड़ी रिफाइनरी (5 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता) अगर युद्ध की चपेट में आती है, तो सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का महत्व

बाजार में सबसे बड़ा डर ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ को लेकर है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है जहाँ से:

वैश्विक तेल आपूर्ति का 20% हिस्सा गुजरता है।

ईरान के तेल निर्यात का 90% हिस्सा इसी रास्ते से चीन जाता है।
यद्यपि ईरान ने इस मार्ग को खुला रखने की बात कही है, लेकिन युद्ध की अनिश्चितता ने व्यापारियों को सतर्क कर दिया है।

OPEC+ की प्रतिक्रिया और भविष्य का अनुमान

बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए OPEC+ (सऊदी अरब और रूस सहित) ने अप्रैल से उत्पादन बढ़ाने का फैसला लिया है। वे अब प्रतिदिन 2.06 लाख बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में उतारेंगे, जो पहले तय की गई मात्रा से काफी अधिक है।

विशेषज्ञों की राय:

“यदि तनाव कम नहीं हुआ या होर्मुज मार्ग में बाधा आई, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। हालांकि, राजनयिक समाधान निकलने पर कीमतें वापस स्थिर हो सकती हैं।”

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