तेहरान में घुसपैठ : कैसे हाई-टेक जासूसी ने ईरानी सुरक्षा घेरे को बेअसर किया

नई दिल्ली (एजेंसी)। ईरान की राजधानी तेहरान में हुए हालिया घटनाक्रमों के पीछे केवल सैन्य ताकत नहीं, बल्कि सालों की सूक्ष्म जासूसी और डिजिटल घुसपैठ का हाथ बताया जा रहा है। हालिया रिपोर्ट्स से यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य शीर्ष नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एक बेहद जटिल और आधुनिक नेटवर्क बिछाया गया था।
डिजिटल सर्विलांस: कैमरों से लेकर नेटवर्क तक सेंध
जासूसी का यह जाल तेहरान की सड़कों से लेकर लोगों के मोबाइल फोन तक फैला हुआ था। ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था को भेदने के लिए निम्नलिखित तरीके अपनाए गए:
ट्रैफिक कैमरों की हैकिंग: तेहरान के सार्वजनिक और सुरक्षा कैमरों को हैक कर उनका डेटा सीधे विदेशी सर्वरों तक पहुँचाया जा रहा था। इससे सुरक्षा काफिलों की रियल-टाइम लोकेशन ट्रैक करना आसान हो गया।
मोबाइल नेटवर्क पर कब्जा: मोबाइल टावरों और नेटवर्क प्रणालियों में घुसपैठ की गई, जिससे सुरक्षा बलों के आपसी संवाद और उनके ड्यूटी चार्ट की जानकारी जुटाई गई।
बॉडीगार्ड्स और सुरक्षा प्रोटोकॉल का विश्लेषण
केवल मशीनों ही नहीं, बल्कि इंसानी व्यवहार का भी गहराई से अध्ययन किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने जटिल एल्गोरिदम और सोशल नेटवर्क एनालिसिस का उपयोग करके यह पता लगाया कि:
कौन सा कमांडो किस अधिकारी के साथ तैनात है।
सुरक्षा कर्मियों के घर के पते और उनके काम करने के घंटे क्या हैं।
पाश्चर स्ट्रीट जैसे संवेदनशील इलाकों में पार्किंग पैटर्न और आवाजाही का समय क्या रहता है।
‘इंटेलिजेंस पिक्चर’: यूनिट 8200 और मोसाद की भूमिका
इस पूरे ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए इजरायल की तकनीकी इंटेलिजेंस इकाई ‘यूनिट 8200’ और मोसाद के जमीनी सूत्रों (Human Intelligence) ने मिलकर काम किया।
महत्वपूर्ण जानकारी: हमले वाले दिन यह सुनिश्चित करने के लिए कि लक्ष्य सटीक स्थान पर मौजूद है, सिग्नल इंटेलिजेंस के साथ-साथ कथित तौर पर एक अमेरिकी खुफिया स्रोत से भी पुख्ता जानकारी साझा की गई थी।
संचार व्यवस्था को ठप करना
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि ऑपरेशन के समय पाश्चर स्ट्रीट के आसपास के मोबाइल टावरों को तकनीकी रूप से बाधित कर दिया गया था। इसके कारण संचार में देरी हुई और सुरक्षा टीमें समय रहते चेतावनी साझा नहीं कर पाईं।
एक खुफिया अधिकारी के अनुसार, तेहरान की गलियों और सुरक्षा ढांचे का विश्लेषण इतने बड़े पैमाने पर किया गया था कि विदेशी एजेंसियों के पास वहां का नक्शा यरुशलम जितना ही स्पष्ट था। अरबों ‘डेटा पॉइंट्स’ के जरिए ईरान के निर्णय लेने वाले केंद्रों की पहचान की गई थी, जिसने अंततः सुरक्षा के बड़े दावों की पोल खोल दी।
















