बिहार की सियासत में बड़े बदलाव के संकेत : क्या नीतीश थामेंगे दिल्ली की राह और निशांत संभालेंगे कमान?

पटना (एजेंसी)। पटना के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक नई चर्चा जोरों पर है—क्या नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ सकते हैं? सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार अब देश की संसद (राज्यसभा) का रुख कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो न केवल बिहार में नेतृत्व बदलेगा, बल्कि राज्य के सत्ता समीकरण भी पूरी तरह बदल जाएंगे।
निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री के कयास
सबसे चौंकाने वाली चर्चा नीतीश कुमार के बेटे, निशांत कुमार को लेकर है। अब तक यह माना जा रहा था कि निशांत राज्यसभा के जरिए राजनीति में कदम रखेंगे, लेकिन अब संभावना जताई जा रही है कि उन्हें बिहार में उपमुख्यमंत्री जैसी बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। यदि नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में जाते हैं, तो बिहार में भाजपा (BJP) का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता भी साफ हो सकता है।
नामांकन और संवैधानिक स्थिति
खबरों के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5 मार्च को राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, उनके राज्यसभा सदस्य बनने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री पद छोड़ने की अनिवार्यता नहीं होगी। संवैधानिक नियमों के तहत, वह अगले छह महीनों तक दोनों पदों की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ महीनों के भीतर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।
बैठकों का दौर और रणनीतिक हलचल
जेडीयू (JDU) ने राज्यसभा की खाली हो रही सीटों और आगामी बदलावों पर चर्चा के लिए कल एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। वहीं, अगले 24 से 48 घंटों के भीतर पटना में एनडीए (NDA) विधायकों की संयुक्त बैठक होने की भी संभावना है।
राज्यसभा उम्मीदवारों की स्थिति:
भाजपा: नितिन नवीन और शिवेश कुमार के नाम तय कर चुकी है।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा: उपेंद्र कुशवाहा का नाम तीसरे उम्मीदवार के तौर पर सामने आया है।
जेडीयू: दो सीटों में से एक पर रामनाथ ठाकुर और दूसरी पर स्वयं नीतीश कुमार के नाम की चर्चा है।
एक युग का अंत या नई शुरुआत?
नीतीश कुमार 2005 से बिहार की सत्ता के केंद्र में रहे हैं। 2025 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू और भाजपा के शानदार प्रदर्शन के बाद वह फिर से मुख्यमंत्री बने, लेकिन अब वह अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी और भविष्य की योजना पर काम करते दिख रहे हैं। निशांत कुमार, जो अब तक लाइमलाइट से दूर रहे हैं, उनका राजनीति में आना बिहार के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।
















