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पश्चिम एशिया में गहराता संकट : सुरक्षित निवेश के रूप में चमके सोना और चांदी

मुंबई (एजेंसी)। वैश्विक राजनीति में बढ़ती उथल-पुथल, विशेषकर मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी सैन्य संघर्षों ने निवेश बाजार की दिशा बदल दी है। शुक्रवार को कमोडिटी मार्केट में जबरदस्त हलचल देखी गई, जहाँ निवेशकों ने जोखिम भरे विकल्पों को छोड़कर ‘सुरक्षित ठिकाने’ (Safe-Haven Assets) के रूप में सोने और चांदी पर भरोसा जताया। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने न केवल सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा की हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़ने का डर भी पैदा कर दिया है।

बाजार के ताज़ा आंकड़े और हलचलशुक्रवार सुबह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ा उछाल दर्ज किया गया:सोना (Gold): अप्रैल वायदा के भाव में करीब $0.67\%$ की वृद्धि देखी गई, जिससे यह 1,60,745 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया।चांदी (Silver): मई डिलीवरी वाली चांदी की कीमतों में भारी बढ़त रही और यह 2,67,524 रुपये प्रति किलोग्राम के पार निकल गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान रहा, जहाँ हाजिर सोना बढ़कर 5,153.91 डॉलर प्रति औंस और चांदी 84.11 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार करती नजर आई।

कीमतों में तेजी के प्रमुख कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उछाल के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण काम कर रहे हैं:

युद्ध की भयावहता: अमेरिका द्वारा अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाने और ईरान की ओर से किए गए जवाबी मिसाइल हमलों ने युद्ध के लंबे खिंचने के संकेत दिए हैं।

आपूर्ति में बाधा: सात दिनों से जारी इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा (तेल और गैस) की सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा मंडरा रहा है, जो सीधा महंगाई को हवा दे सकता है।

आर्थिक अनिश्चितता: निवेशक वर्तमान में शेयर बाजार जैसे अस्थिर क्षेत्रों से पैसा निकालकर सोने में लगाना सुरक्षित मान रहे हैं।

बाजार विश्लेषकों की राय

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि हाल ही में कुछ स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit Booking) देखी गई है, लेकिन मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए सोने की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की संभावना बहुत कम है। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीतियों और आने वाले यूरोपीय संघ के जीडीपी आंकड़ों पर भी बाजार की पैनी नजर है।

आगे की राह: आने वाले दिनों में अमेरिका के रिटेल सेल्स और फैक्ट्री ऑर्डर्स के आंकड़े यह तय करेंगे कि बाजार में यह तेजी कितनी स्थिर रहती है।

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