भारतीय कृषि का आधुनिक कायाकल्प : प्रधानमंत्री मोदी का नया दृष्टिकोण

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ‘कृषि एवं ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर आयोजित एक महत्वपूर्ण वेबिनार को संबोधित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना समय की मांग है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इस वर्ष के बजट में किए गए विशेष प्रावधानों को जमीनी स्तर पर लागू करने में विशेषज्ञों के सुझाव और चर्चाएं मील का पत्थर साबित होंगी।
वैश्विक बाजार और निर्यात पर ध्यान
प्रधानमंत्री ने बदलते वैश्विक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि आज दुनिया के बाजार भारतीय उत्पादों के लिए खुल रहे हैं। उन्होंने विशेषज्ञों से आग्रह किया कि वे भारतीय खेती को ‘निर्यात उन्मुख’ (Export Oriented) बनाने की दिशा में काम करें। भारत की विविध जलवायु और विभिन्न ‘एग्रो-क्लाइमेटिक ज़ोन’ का लाभ उठाते हुए हमें अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुरूप उत्पादन बढ़ाना होगा।
क्षेत्रीय फसलों और उच्च मूल्य कृषि को प्रोत्साहन
बजट की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए पीएम मोदी ने निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
उच्च मूल्य कृषि (High-Value Agriculture): पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब उन फसलों पर ध्यान दिया जा रहा है जिनका बाजार मूल्य अधिक है।
नारियल उत्पादन: केरल और तमिलनाडु के किसानों की आय बढ़ाने के लिए इस बार नारियल की खेती को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है।
उत्तर-पूर्व का विकास: पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट फसलों को बढ़ावा देने के लिए बजट में विशेष प्रस्ताव रखे गए हैं।
किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा कवच
प्रधानमंत्री ने कृषि क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार और विकास यात्रा का रणनीतिक स्तंभ बताया। उन्होंने सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों का विवरण भी साझा किया:
योजना/क्षेत्र,मुख्य उपलब्धि
पीएम किसान सम्मान निधि,10 करोड़ किसानों के खातों में 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक का हस्तांतरण।
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP),सुधारों के माध्यम से किसानों को उनकी लागत का 1.5 गुना रिटर्न सुनिश्चित।
संस्थागत ऋण,ऋण का कवरेज क्षेत्र अब 75% से अधिक हो गया है।
पीएम फसल बीमा योजना,लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के दावों का सफलतापूर्वक निपटान।
प्रधानमंत्री ने अंत में जोर देकर कहा कि बजट का एक-एक पैसा सही लाभार्थी तक पहुँचना चाहिए। उन्होंने वेबिनार में मौजूद कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य अधिकारियों से कहा कि वे अनुभवी विशेषज्ञों के सुझावों को लागू कर कृषि क्षेत्र में जोखिम कम करने और किसानों को बुनियादी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में तेजी से काम करें।







