जेवर एयरपोर्ट के विकास में बड़ी उपलब्धि : सीएम योगी को सौंपा गया एयरोड्रम लाइसेंस

लखनऊ (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के विमानन क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित करते हुए, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) का आधिकारिक एयरोड्रम लाइसेंस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दिया गया है। भारत सरकार द्वारा जारी यह लाइसेंस जेवर में स्थित इस महत्वाकांक्षी हवाई अड्डे के वाणिज्यिक संचालन की शुरुआत के लिए सबसे महत्वपूर्ण कानूनी स्वीकृति है।
संचालन की ओर बढ़ते कदम
एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उन्हें परियोजना की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त होने के बाद अब अंतिम चरण की नियामक मंजूरियों पर काम चल रहा है।
सुरक्षा जांच: वर्तमान में हवाई अड्डे का ‘एयरोड्रम सिक्योरिटी प्रोग्राम’ ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) के पास समीक्षाधीन है।
उद्घाटन की तैयारी: सुरक्षा संबंधी अंतिम अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) मिलते ही, एयरपोर्ट प्रबंधन विमानन एजेंसियों के साथ मिलकर उद्घाटन और पहली कमर्शियल फ्लाइट की तारीख का ऐलान करेगा।
एयरपोर्ट की क्षमता और चरणबद्ध विकास
यह ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा स्विट्जरलैंड की कार्यकुशलता और भारतीय अतिथि सत्कार का एक अनूठा संगम होगा। इसका निर्माण चार मुख्य चरणों में किया जा रहा है:
चरण, यात्री क्षमता (प्रति वर्ष), मुख्य विशेषताएं
प्रथम चरण,1.2 करोड़,1 रनवे और 1 टर्मिनल भवन (1.38 लाख वर्गमीटर)
द्वितीय चरण,3 करोड़,टर्मिनल और सुविधाओं का विस्तार
तृतीय एवं चतुर्थ,7 करोड़ (कुल),पूर्ण क्षमता और वैश्विक कनेक्टिविटी
अत्याधुनिक सुविधाएं और तकनीक
यात्रियों के अनुभव को सुगम बनाने के लिए एयरपोर्ट को भविष्य की तकनीक से लैस किया गया है:
डिजिटल प्रोसेसिंग: यहाँ ‘डिजीयात्रा’ आधारित बायोमेट्रिक सिस्टम और सेल्फ बैगेज ड्रॉप की सुविधा होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर: टर्मिनल में 48 चेक-इन काउंटर, 28 विमान पार्किंग स्टैंड और 10 एयरोब्रिज तैयार किए गए हैं।
कार्गो हब: माल ढुलाई के लिए एक विशाल लॉजिस्टिक्स हब बनाया जा रहा है, जिसकी शुरुआती क्षमता 2.5 लाख टन होगी।
पर्यावरण और आर्थिक प्रभाव
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट न केवल दिल्ली-एनसीआर के हवाई यातायात के बोझ को कम करेगा, बल्कि यह ‘नेट जीरो’ (Net Zero) उत्सर्जन के लक्ष्य पर काम करने वाला एक टिकाऊ प्रोजेक्ट है। यहाँ वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस एयरपोर्ट के सक्रिय होने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश, पर्यटन और रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।















