छत्तीसगढ़

लोक कला की संवाहिका सुरुज बाई खांडे को मुख्यमंत्री ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर। छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक माटी की सुगंध को पूरी दुनिया में बिखेरने वाली प्रसिद्ध भरथरी गायिका स्वर्गीय सुरुज बाई खांडे की पुण्यतिथि (10 मार्च) पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने उन्हें नमन किया है। मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र में उनके अविस्मरणीय योगदान को याद करते हुए अपनी गहरी संवेदनाएं और सम्मान प्रकट किया।

लोक संस्कृति की अनुपम पहचान

मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने संदेश में कहा कि सुरुज बाई खांडे केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध लोक परंपरा की एक सशक्त पहचान थीं। उनके कंठ में बसी मिठास और भरथरी गायन की उनकी विशिष्ट शैली ने इस पारंपरिक कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक नया गौरव दिलाया।

विरासत का संरक्षण और नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

लेख में मुख्यमंत्री के हवाले से बताया गया कि सुरुज बाई ने लुप्त होती लोक कलाओं को न केवल सहेजा, बल्कि उन्हें जीवंत बनाए रखने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उनका कार्य आने वाली पीढ़ी के कलाकारों के लिए एक मार्गदर्शक की तरह है।

“सुरुज बाई खांडे जी का समर्पण और उनकी कला साधना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का एक अनमोल हिस्सा है। उनके द्वारा स्थापित प्रतिमान प्रदेशवासियों के हृदय में सदैव जीवित रहेंगे।”
— मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

छत्तीसगढ़ सरकार और प्रदेश की जनता उनके इस अमूल्य योगदान के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगी।

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