मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव : ब्रेंट क्रूड $90 के पार, अमेरिका-ईरान संघर्ष से सप्लाई पर संकट

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में हवाई हमलों के तेज होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सोमवार को कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जोरदार उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई है, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude) भी 84 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। दोनों ही प्रमुख बेंचमार्क में 2 फीसदी से अधिक की तेजी देखी जा रही है।
बुनियादी ढांचे पर हमले और सप्लाई में रुकावट की आशंका
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के अनुसार, जुलाई के निचले स्तर की तुलना में कच्चे तेल की कीमतों में अब तक करीब 30% का उछाल आ चुका है। इसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच हुआ अस्थायी शांति समझौता टूटना है।
तनाव अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देश एक-दूसरे के पुलों, बंदरगाहों और सार्वजनिक उपयोग की सेवाओं (यूटिलिटी) को निशाना बना रहे हैं। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी करने के बाद, ईरान ने भी अमेरिका के साथ युद्धविराम खत्म करने का एलान कर दिया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी सैन्य गतिविधियां
वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास टकराव काफी हिंसक हो गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने वीकेंड पर इस क्षेत्र से गुजर रहे चार कमर्शियल जहाजों को रोक लिया। इसी बीच, कुवैत पेट्रोलियम कॉर्प ने भी पुष्टि की है कि शनिवार को उनके एक तेल संयंत्र (Oil Facility) पर ईरानी हमला हुआ है, जिससे खाड़ी देशों से तेल की आपूर्ति बाधित होने का खतरा और गहरा गया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया महंगाई का खतरा
कच्चे तेल की कीमतों में आ रही इस बेतहाशा तेजी ने वैश्विक स्तर पर चिंताएं बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊर्जा संकट जल्द शांत नहीं हुआ, तो दुनिया भर में एक बार फिर महंगाई (Inflation) का नया दौर शुरू हो सकता है, जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी।
















