विक्रम विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह, उपाधि केवल प्रमाण-पत्र नहीं, राष्ट्र सेवा का संकल्प है : राज्यपाल पटेल

उज्जैन (एजेंसी)। उज्जैन स्थित सम्राट विक्रमादित्य (विक्रम) विश्वविद्यालय का 30वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने अध्यक्षता की, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। समारोह में कुल 74 विद्यार्थियों को उपाधियाँ, 107 को स्वर्ण पदक और एक शोधार्थी को डी-लिट की मानद उपाधि से नवाजा गया।
संस्कारों के साथ समाज निर्माण में जुटें युवा: राज्यपाल
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने दीक्षित हो रहे छात्र-छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि एक उत्तरदायी नागरिक बनकर देश के उत्थान में योगदान देना है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा:
विश्वविद्यालय से प्राप्त संस्कारों को जीवन भर याद रखें।
कठिनाइयों में पाल-पोसकर बड़ा करने वाले माता-पिता और मार्गदर्शन देने वाले गुरुओं के प्रति सदैव कृतज्ञ रहें।
समाज के वंचित वर्गों के कल्याण और राष्ट्र की एकता के लिए कार्य करें।
उज्जैन: ज्ञान और शौर्य की ऐतिहासिक धरा – मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से ही वैश्विक ज्ञान-विज्ञान का केंद्र रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह वही पावन भूमि है जिसे स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी शिक्षा के लिए चुना था।
समारोह की मुख्य बातें:
गौरवशाली इतिहास: मुख्यमंत्री ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के नाम से जुड़ा यह विश्वविद्यालय सात दशकों से श्रेष्ठ मानव संसाधन गढ़ रहा है।
नवाचार में अग्रणी: यह प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है जिसने कृषि अध्ययन और डेयरी टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक विषयों की शुरुआत की है।
बड़ी घोषणाएं: विश्वविद्यालय के विकास हेतु मुख्यमंत्री ने 51 लाख रुपये, 5 ड्रोन और शैक्षणिक भ्रमण के लिए एक बस देने की घोषणा की।
विकास का रोडमैप: उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 को ‘किसान कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है और 2028 में होने वाले भव्य सिंहस्थ के लिए सरकार अभी से बुनियादी तैयारियाँ कर रही है।
प्रमुख लोकार्पण एवं गतिविधियाँ
समारोह के दौरान राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने शिक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का शुभारंभ किया:
लोकार्पण: ₹17 करोड़ की लागत से बने नवीन कृषि अध्ययनशाला भवन और जीर्णोद्धार किए गए भर्तृहरि छात्रावास का उद्घाटन।
पुस्तक विमोचन: विद्यार्थियों द्वारा संपादित चार पुस्तकों (‘ईकोस एण्ड एक्सप्रेशन्स’, ‘कंटूर्स ऑफ थॉट’, ‘रागात्मिका’ आदि) का विमोचन।
प्रदर्शनी: अतिथियों ने विश्वविद्यालय की हथकरघा इकाई द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
सम्मान: वाणिज्य विषय की स्नातक सुश्री श्वेता तलेसरा को डी-लिट की उपाधि प्रदान की गई।
अकादमिक शोभायात्रा और सांस्कृतिक गरिमा
कार्यक्रम की शुरुआत भव्य अकादमिक शोभायात्रा के साथ हुई, जिसमें राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कार्यपरिषद के सदस्य शामिल हुए। सम्राट विक्रमादित्य की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद एनसीसी कैडेट्स ने ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और अंत में सभी स्नातक विद्यार्थियों को समाज सेवा की शपथ दिलाई गई।
इस अवसर पर सांसद श्री अनिल फिरोजिया, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव सहित अनेक गणमान्य नागरिक और अभिभावक उपस्थित रहे।
















