मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव : वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर मंडराया संकट, करोड़ों लोगों के सामने दाने-दाने की चुनौती

नई दिल्ली (एजेंसी)। संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने एक डरावनी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो दुनिया एक बड़े मानवीय संकट की ओर बढ़ जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध के चलते करीब 4.5 करोड़ अतिरिक्त लोग भुखमरी की कगार पर पहुँच सकते हैं।
वर्तमान स्थिति और भविष्य का खतरा
आंकड़ों की मानें तो वर्तमान में विश्व स्तर पर लगभग 31.8 करोड़ लोग पहले से ही खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यह संघर्ष साल के मध्य तक खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बनी रहती हैं, तो प्रभावितों की संख्या 35 करोड़ को पार कर जाएगी। यह संकट 2022 के यूक्रेन युद्ध के समय आई भीषण भुखमरी के स्तर को भी पीछे छोड़ सकता है।
ऊर्जा संकट और खाने की थाली का संबंध
ईरान और मध्य-पूर्व क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ हैं। युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है।
ईंधन की बढ़ती कीमतें: तेल महंगा होने से खेती की लागत और परिवहन खर्च बढ़ गया है।
उर्वरक की कमी: खाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति रुकने से अनाज उत्पादन प्रभावित हो रहा है।
सप्लाई चेन: युद्धग्रस्त क्षेत्रों से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों के रुकने से वैश्विक स्तर पर खाद्यान्न की उपलब्धता कम हो गई है।
सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्र
इस संकट का सबसे बुरा असर उन देशों पर पड़ेगा जो अपनी जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं:
एशिया: यहाँ भुखमरी की दर में 24% तक की वृद्धि की आशंका है।
पश्चिम और मध्य अफ्रीका: खाद्य संकट में 21% की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
सूडान और सोमालिया: यहाँ अनाज की कीमतें पहले ही आसमान छू रही हैं, जिससे लाखों परिवार रोटी के लिए तरस रहे हैं।
संसाधनों की कमी और मानवीय चुनौती
WFP के उप कार्यकारी निदेशक कार्ल स्काउ ने आगाह किया है कि यह युद्ध केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसकी गूँज दुनिया भर की रसोई में सुनाई देगी। सबसे बड़ी चिंता यह है कि खुद विश्व खाद्य कार्यक्रम इस समय फंड की भारी कमी से जूझ रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने जल्द ही संसाधनों और कूटनीति का सहारा नहीं लिया, तो कई देशों में अकाल जैसी भयावह स्थिति पैदा हो सकती है।
















