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अमेरिका के मिनेसोटा में हिंदूफोबिया के विरुद्ध एकजुटता : भेदभाव को मिटाने के लिए विधायी प्रस्ताव पेश

मिनेसोटा (एजेंसी)। अमेरिका के मिनेसोटा राज्य में हिंदू समुदाय के प्रति बढ़ती नफरत और भेदभाव (हिंदूफोबिया) के खिलाफ एक महत्वपूर्ण विधायी कदम उठाया गया है। हाल ही में राज्य की सीनेट में एक प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य हिंदू अमेरिकियों को निशाना बनाने वाली घटनाओं की कड़े शब्दों में निंदा करना और उन्हें आधिकारिक मान्यता देना है। इस मुहिम को स्थानीय समुदाय का व्यापक समर्थन मिल रहा है, जिसमें 400 से अधिक नागरिकों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमति जताई है।

प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य

9 मार्च को मिनेसोटा सीनेट के समक्ष रखे गए इस प्रस्ताव का लक्ष्य केवल नफरत की निंदा करना ही नहीं है, बल्कि राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता और आपसी सम्मान के मूल्यों को सुदृढ़ करना भी है। ‘कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ (CoHNA) इस पहल का नेतृत्व कर रहा है। संगठन का मानना है कि हिंदू समुदाय के खिलाफ होने वाले भेदभाव को जब तक आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा, तब तक इससे लड़ना कठिन होगा।

बढ़ती घटनाएं और गवाहों के बयान

सीनेट की न्यायपालिका और सार्वजनिक सुरक्षा समिति के सामने समुदाय के प्रतिनिधियों ने अपनी आपबीती साझा की। गवाही के दौरान कई चिंताजनक उदाहरण पेश किए गए, जिनमें शामिल हैं:

एदिना (Edina) के एक मंदिर में की गई अभद्र और नफरती बयानबाजी।

मेपल ग्रोव (Maple Grove) में पुजारी परिवारों के घरों में हुई चोरी की घटनाएं।

विभिन्न हिंदू संस्थानों में तोड़फोड़ और डराने-धमकाने के मामले।

CoHNA की क्षेत्रीय निदेशक नेहा मरकंडा ने जोर देकर कहा कि जिस नफरत को नाम नहीं दिया जाता, उसे अक्सर समाज अनदेखा कर देता है। उन्होंने विधायकों से आग्रह किया कि हिंदू समुदाय के दर्द को पहचान कर उन्हें सुरक्षा और गरिमा का आश्वासन दिया जाए।

व्यापक समर्थन और अन्य समुदायों की भूमिका

दिलचस्प बात यह है कि इस प्रस्ताव को केवल हिंदू समाज ही नहीं, बल्कि अन्य धार्मिक समूहों का भी साथ मिल रहा है। ‘यहूदी समुदाय संबंध परिषद’ (JCRC) के एथन रॉबर्ट्स ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की धार्मिक नफरत को पहचानना उसे खत्म करने की पहली सीढ़ी है। उन्होंने यहूदी समुदाय के अनुभवों का हवाला देते हुए बताया कि नफरत को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।

रिपोर्ट और भविष्य की रणनीति

रटगर्स यूनिवर्सिटी की 2022 की एक रिपोर्ट ने भी सोशल मीडिया पर बढ़ते हिंदू-विरोधी विमर्श और उससे होने वाली वास्तविक हिंसा के खतरों के प्रति सचेत किया था। मिनेसोटा में भारतीय प्रवासियों की बढ़ती संख्या के बीच, यह प्रस्ताव नागरिक अधिकारों और समावेशी समाज की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है।

CoHNA का कहना है कि वे स्थानीय सांसदों और विभिन्न समुदायों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे ताकि डेटा के माध्यम से हिंदू अमेरिकियों की चिंताओं को दूर किया जा सके और एक सुरक्षित वातावरण तैयार किया जा सके।

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