बस्तर में साक्षरता का नया अध्याय : हिंसा का रास्ता छोड़ कलम थाम रहे युवा

बस्तर। बस्तर में शिक्षा की नई रोशनी फैलाने के लिए ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत रविवार को एक विशेष महापरीक्षा आयोजित की गई। यह कार्यक्रम केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे जिले में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया है। इस परीक्षा में जिले के विभिन्न हिस्सों से कुल 25,706 लोगों ने हिस्सा लेकर साक्षर बनने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है।
मुख्यधारा से जुड़ते पुनर्वासित और बंदी
इस आयोजन का सबसे प्रेरणादायक पहलू जगदलपुर की जेल और पुनर्वास केंद्रों से जुड़ा रहा। साक्षरता की इस मुहिम में 141 बंदियों (94 पुरुष और 47 महिलाएं) ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव आड़ावाल पुनर्वास केंद्र में देखने को मिला, जहाँ 28 ऐसे युवाओं ने परीक्षा दी, जिन्होंने कभी हिंसा का रास्ता चुना था। अब ये युवा हथियारों को छोड़कर शिक्षा और विकास के मार्ग पर चलने का संकल्प ले चुके हैं। यह बदलाव बस्तर में भविष्य के स्थायी शांति और भयमुक्त वातावरण की एक मजबूत उम्मीद जगाता है।
व्यापक स्तर पर आयोजन
साक्षरता के इस महापर्व को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की थीं। दुर्गम और वनांचलों में रहने वाले लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूरे जिले में 812 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इन केंद्रों पर प्रतिभागियों की बुनियादी शिक्षा, जैसे पढ़ना, लिखना और अंकगणित के कौशल का आकलन किया गया।
इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए वरिष्ठ अधिकारी भी सक्रिय रहे। संयुक्त संचालक एचआर सोम ने जगदलपुर केंद्रीय जेल का दौरा कर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल, नोडल अधिकारी राकेश खापर्डे और अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने परीक्षा के सुचारू संचालन में अपनी भूमिका निभाई।
















