न्यायिक स्वतंत्रता पर प्रहार : सुप्रीम कोर्ट ने कालियाचक मामले में केंद्रीय जांच के दिए आदेश

नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के कालियाचक में न्यायिक अधिकारियों के घेराव और उन पर हुए हमले को न्यायपालिका की गरिमा पर सीधा हमला करार दिया है। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि वह इस पूरी घटना की जांच सीबीआई (CBI) या एनआईए (NIA) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराए।
कोर्ट की कड़ी टिप्पणी और नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने पश्चिम बंगाल प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट की मुख्य आपत्तियां निम्नलिखित हैं:
प्रशासनिक विफलता: कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा सूचित किए जाने के बावजूद, पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर देरी से पहुंचे। अदालत ने इसे प्रशासन की अक्षमता नहीं, बल्कि बड़ी लापरवाही माना है।
सुनियोजित साजिश: सीजेआई ने टिप्पणी की कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं लगती, बल्कि न्यायिक अधिकारियों को डराने और उनके मनोबल को तोड़ने के लिए रची गई एक सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है।
न्यायपालिका को चुनौती: अदालत ने स्पष्ट किया कि ऑन-ड्यूटी न्यायिक अधिकारियों को निशाना बनाना सीधे तौर पर कानून के शासन को चुनौती देना है।
अधिकारियों को ‘कारण बताओ’ नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के शीर्ष अधिकारियों पर शिकंजा कसा है। अदालत ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
नोटिस जारी: मुख्य सचिव, डीजीपी, जिलाधिकारी और एसएसपी को ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी किया गया है।
व्यक्तिगत उपस्थिति: इन सभी अधिकारियों को 6 अप्रैल को शाम 4 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का आदेश दिया गया है। उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि सुरक्षा में चूक के लिए उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए।
जांच रिपोर्ट: केंद्रीय जांच एजेंसी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में जमा करने का निर्देश दिया गया है।
“न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी भीड़ या व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती।” – सुप्रीम कोर्ट
अदालत के इस कड़े रुख से यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और न्यायिक सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
















