आर्टेमिस-2 मिशन : आधी सदी बाद चंद्रमा के ‘डार्क साइड’ का दीदार करेंगे इंसान

वॉशिंगटन (एजेंसी)। अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में आज एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नासा (NASA) का बहुप्रतीक्षित आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन चंद्रमा के उस ‘सुदूर हिस्से’ (Far Side) की ओर प्रस्थान कर रहा है, जिसे पृथ्वी से देख पाना संभव नहीं है। साल 1972 के बाद यह पहला अवसर है जब मानव युक्त कोई यान चंद्रमा की इतनी करीब से परिक्रमा करेगा। इस ऐतिहासिक सफर में अमेरिका के तीन और कनाडा का एक अंतरिक्ष यात्री शामिल है।
6 घंटे का फ्लाई-बाय: विज्ञान और चुनौती का संगम
इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह के ऊपर से गुजरेंगे (फ्लाई-बाय), जिसकी अवधि लगभग 6 घंटे होगी। ह्यूस्टन स्थित जॉनसन स्पेस सेंटर और दुनिया भर के वैज्ञानिक इस पल पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
इस फ्लाई-बाय का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की भौगोलिक संरचना और उसके विशाल गड्ढों (क्रेटर) का प्रत्यक्ष अध्ययन करना है। हालांकि, एक तकनीकी चुनौती यह भी है कि वर्तमान कक्षीय स्थिति के कारण, चंद्रमा के सुदूर हिस्से का केवल 20% भाग ही सूर्य की रोशनी में प्रकाशित रहेगा, जिससे दृश्यता सीमित हो सकती है।
मिशन के ‘नायक’ और नया इतिहास
यह मिशन विविधता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की एक नई मिसाल पेश कर रहा है:
जेरेमी हैनसेन: वे चंद्रमा के मिशन पर जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी (कनाडाई) अंतरिक्ष यात्री बनकर इतिहास रचेंगे।
क्रिस्टीना कोच और विक्टर ग्लोवर: कोच चंद्रमा तक पहुंचने वाली पहली महिला और ग्लोवर पहले अश्वेत अंतरिक्ष यात्री होंगे।
रीड वाइजमैन: मिशन का नेतृत्व कर रहे अनुभवी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री।
यह 10 दिवसीय मिशन प्रशांत महासागर में सुरक्षित लैंडिंग के साथ संपन्न होगा।
ओरियन कैप्सूल में तकनीकी बाधा
सफलता के उत्साह के बीच, ओरियन कैप्सूल में एक छोटी तकनीकी समस्या भी सामने आई है। यान का टॉयलेट (शौचालय) ठीक से काम नहीं कर रहा है, जिसके कारण अंतरिक्ष यात्रियों को अतिरिक्त यूरिन बैग्स का उपयोग करने की सलाह दी गई है। नासा प्रबंधन के अनुसार, कैप्सूल के भीतर हल्की दुर्गंध की समस्या भी रिपोर्ट की गई है, जिसे दूर करने के प्रयास जारी हैं।
प्राचीन रहस्यों की खोज: ओरिएंटल बेसिन और क्रेटर
वैज्ञानिकों के लिए चंद्रमा का ओरिएंटल बेसिन सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र है। लगभग 930 किलोमीटर चौड़ा यह बेसिन करोड़ों साल पहले किसी विशाल क्षुद्रग्रह के टकराने से बना था। इसके अलावा, चालक दल 64 किमी चौड़े ‘ओहम क्रेटर’ और 9 किमी चौड़े ‘पियराज्जो क्रेटर’ का भी बारीकी से निरीक्षण करेगा।
कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी की प्रमुख लिसा कैंपबेल ने इस मौके पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि जेरेमी हैनसेन की यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।














