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भारत के लिए बड़ी राहत : होर्मुज जलडमरूमध्य से निकला 9वां एलपीजी टैंकर

नई दिल्ली (एजेंसी)। ईरान के साथ जारी तनावपूर्ण स्थितियों के बीच भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर एक अच्छी खबर आई है। देश में एलपीजी (LPG) की संभावित किल्लत को देखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से भारत के नौवें गैस टैंकर, ‘ग्रीन आशा’, को सुरक्षित निकलने की अनुमति मिल गई है। भारतीय ध्वज वाला यह विशाल जहाज भारी मात्रा में रसोई गैस लेकर स्वदेश लौट रहा है।

इससे पहले 3 अप्रैल को ‘ग्रीन सांवी’ नामक टैंकर को भी इसी रास्ते से सुरक्षित निकाला गया था, जो लगभग 46 हजार टन एलपीजी के साथ भारत आ रहा है। इन सफल प्रयासों से उम्मीद जताई जा रही है कि घरेलू बाजार में गैस की कमी जल्द ही दूर हो जाएगी।

कूटनीति और वर्तमान स्थिति

ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह भारतीय जहाजों के मार्ग में बाधा उत्पन्न नहीं करेगा, हालांकि अमेरिका और इजरायल समर्थक देशों के लिए यह जलमार्ग बंद किया जा सकता है।

इंतजार में ‘जग विक्रम’: रिपोर्टों के अनुसार, भारत का एक और टैंकर ‘जग विक्रम’ वर्तमान में सुरक्षा अनुमति (Permission) मिलने की प्रतीक्षा कर रहा है। इन जहाजों को सुरक्षा कारणों से चरणबद्ध तरीके से निकाला जा रहा है, जिसमें कच्चे तेल और एलपीजी ले जाने वाले जहाजों को प्राथमिकता दी जा रही है।

फंसे हुए जहाज: शिपिंग महानिदेशालय की जानकारी के मुताबिक, फिलहाल 16 भारतीय जहाज अब भी होर्मुज क्षेत्र के आसपास मौजूद हैं। इनमें से 5 जहाज शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के हैं। इसके अलावा ओमान और अदन की खाड़ी सहित लाल सागर में भी भारतीय जहाजों की मौजूदगी बनी हुई है।

भारतीय नाविकों की सुरक्षा

खाड़ी के अशांत क्षेत्रों में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।

क्षेत्र में लगभग 20,500 भारतीय नाविक कार्यरत हैं।

3 अप्रैल को कूटनीतिक प्रयासों के जरिए विभिन्न कंपनियों द्वारा 1,130 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है।

भारत सरकार लगातार ईरानी प्रशासन के साथ उच्च स्तरीय वार्ता कर रही है ताकि जहाजों और कर्मियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जा सके।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव

इस बीच, वैश्विक स्थिति और भी गंभीर होती दिख रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। ट्रंप ने तेहरान में हाल ही में हुए हमलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि ईरान ने अगले 48 घंटों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोला, तो उसे और भी विनाशकारी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस खींचतान के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है, जहाँ ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुँच गया है। भारत के लिए चुनौती इन विपरीत परिस्थितियों के बीच अपनी ऊर्जा आपूर्ति को निर्बाध बनाए रखने की है।

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