वैकल्पिक ऊर्जा की खोज : कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी का ‘मिशन बायोगैस’ और विकास का नया रोडमैप

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में पैदा हुई बाधाओं के कारण दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। इस वैश्विक संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। गुरुवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की एक उच्च स्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री ने देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए वैकल्पिक और नए स्रोतों पर काम तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने एलपीजी (रसोई गैस) पर निर्भरता कम करने के लिए घरेलू स्तर पर बायोगैस के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया।
विदेश दौरे से लौटते ही मैराथन बैठक
पाँच देशों (यूएई और चार यूरोपीय राष्ट्रों) की अपनी महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा से वापस आते ही प्रधानमंत्री सीधे एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने मंत्रियों के साथ लगभग साढ़े तीन घंटे तक विस्तृत मंथन किया। इस विदेशी दौरे के दौरान भी पश्चिम एशिया के हालात और उससे पैदा होने वाली चुनौतियों पर वैश्विक नेताओं के साथ गंभीर चर्चा हुई थी।
बैठक की शुरुआत में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री के इस पांच दिवसीय दौरे की उपलब्धियों और मुख्य नतीजों पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) दी। इसके बाद अलग-अलग विभागों के आला अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट साझा की।
‘ईज ऑफ लिविंग’ पहली प्राथमिकता
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सरकार की प्राथमिकता आम जनमानस का जीवन सुगम बनाना है। उन्होंने मंत्रियों को हिदायत दी कि प्रशासनिक सुधारों या किसी भी नई योजना को लागू करते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा जाए कि आम नागरिकों को कोई असुविधा न हो। शासन का मूल उद्देश्य जनता को राहत पहुंचाना होना चाहिए।
2047 का लक्ष्य: एक अटूट संकल्प
मंत्रियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का विजन महज एक राजनीतिक नारा नहीं है, बल्कि यह देश को समृद्ध बनाने का हमारा दृढ़ संकल्प है। उन्होंने सरकार के मूल मंत्र ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म और इन्फॉर्म’ को दोहराते हुए कहा कि हमें अतीत की कमियों पर समय गंवाने के बजाय पूरी ऊर्जा के साथ भविष्य की तैयारियों में जुट जाना चाहिए।
मंत्रालयों की समीक्षा और प्रदर्शन रैंकिंग
वर्तमान एनडीए सरकार आगामी 9 जून को अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूरे करने जा रही है। इस अवसर को देखते हुए बैठक में विदेश, कृषि, वन एवं पर्यावरण, सड़क परिवहन, श्रम, वाणिज्य और ऊर्जा सहित कई प्रमुख मंत्रालयों ने पिछले दो वर्षों में किए गए नीतिगत सुधारों का लेखा-जोखा पेश किया। इस दौरान कैबिनेट सचिव और नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने भी अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
बैठक में पारदर्शी शासन को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालयों के कामकाज की गहन समीक्षा की गई। फाइलों के निपटारे की गति और जन-शिकायतों के निवारण जैसे मानकों के आधार पर विभागों का आकलन किया गया, जिसके तहत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले शीर्ष-5 और सबसे धीमे कामकाज वाले निचले-5 मंत्रालयों की एक रैंकिंग सूची भी तैयार की गई है।
















