ऊर्जा सुरक्षा की ओर बड़ी कामयाबी : 20 हजार टन LPG लेकर गुजरात तट पर पहुंचा ‘जग विक्रम’

नई दिल्ली (एजेंसी)। क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर एक राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय ध्वजवाहक जहाज ‘जग विक्रम’ 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी (LPG) की खेप लेकर मंगलवार को गुजरात के कांडला बंदरगाह पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया 14 दिवसीय युद्धविराम समझौते के बाद, रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार करने वाला यह पहला भारतीय मालवाहक जहाज है।
सुरक्षा और सतर्कता के बीच सफल यात्रा
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने पुष्टि की कि इस जहाज ने 11 अप्रैल को ही संवेदनशील समुद्री मार्ग को पार कर लिया था। 24 भारतीय नाविकों के दल वाला यह जहाज सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुंच चुका है। मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान स्थिति भारतीय जहाजों और चालक दल के लिए पूरी तरह नियंत्रण में है।
समुद्री सुरक्षा पर मुख्य अपडेट:
सुरक्षित वापसी: सरकार ने अब तक 2,177 से अधिक भारतीय नाविकों की सुरक्षित घर वापसी सुनिश्चित की है।
निरंतर निगरानी: विदेश मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों के साथ तालमेल बिठाकर खाड़ी क्षेत्र में हर हलचल पर नजर रखी जा रही है।
बंदरगाहों की स्थिति: देश के सभी प्रमुख बंदरगाहों पर कामकाज सामान्य रूप से चल रहा है और कहीं भी माल की आवाजाही में रुकावट या भीड़ (congestion) की समस्या नहीं है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रूट?
भारत अपनी रसोई गैस (LPG) की कुल जरूरत का लगभग 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रास्तों का सुरक्षित रहना भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) के लिए अनिवार्य है।
“पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली है। नाविकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और समुद्री मार्ग अब धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।”
— मुकेश मंगल, अतिरिक्त सचिव
‘जग विक्रम’ का बिना किसी बाधा के भारत पहुंचना इस बात का संकेत है कि युद्धविराम के बाद अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों पर स्थिरता लौट रही है। यह भारत के लिए न केवल आर्थिक बल्कि कूटनीतिक दृष्टि से भी एक बड़ी उपलब्धि है।
















