पीएम मोदी का आगामी यूरोप दौरा : रणनीतिक संबंधों को मिलेगी नई धार

नई दिल्ली (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने मई के मध्य में एक सप्ताह की महत्वपूर्ण यूरोप यात्रा पर निकलने वाले हैं। इस विदेश दौरे का प्राथमिक लक्ष्य यूरोपीय देशों के साथ भारत के व्यापारिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। अपनी इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नॉर्वे, नीदरलैंड और इटली के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
नॉर्वे: भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन और निवेश पर चर्चा
प्रधानमंत्री की यात्रा का एक अहम पड़ाव नॉर्वे की राजधानी ओस्लो होगा। यहाँ वे तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे, जहाँ स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड के शीर्ष नेताओं के साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर मंथन होगा।
आर्थिक लाभ: भारत-EFTA समझौते के तहत यूरोपीय देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा है, जिससे देश में लगभग 10 लाख रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
प्रमुख क्षेत्र: ओस्लो में होने वाली बातचीत मुख्य रूप से हरित ऊर्जा (Green Energy), नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy), डिजिटल नवाचार और आर्कटिक क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित रहेगी।
नीदरलैंड: तकनीक और जल प्रबंधन में साझेदारी
नॉर्वे के बाद पीएम मोदी नीदरलैंड का रुख करेंगे। नीदरलैंड लंबे समय से जल प्रबंधन, आधुनिक कृषि और आतंकवाद विरोधी अभियानों में भारत का सहयोगी रहा है। इस यात्रा के दौरान पिछले कुछ समय से लंबित परियोजनाओं और द्विपक्षीय समझौतों को अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि दोनों देशों के बीच तकनीकी आदान-प्रदान को और तेज किया जा सके।
इटली और वेटिकन सिटी: रक्षा और कूटनीति का नया अध्याय
प्रधानमंत्री मोदी की इटली यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उनकी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय यात्रा होगी। वे इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।
वेटिकन सिटी: दौरे के दौरान पीएम मोदी के वेटिकन सिटी जाने और ईसाई धर्मगुरु पोप से मुलाकात करने की भी संभावना है, जो वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक और धार्मिक संवाद का एक बड़ा संकेत होगा।
यूरोप के साथ बढ़ती नजदीकी: एक नजर में
यह दौरा जनवरी 2026 में नई दिल्ली में हुए भारत-यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन की अगली कड़ी है। उस समय भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) और ‘सुरक्षा एवं रक्षा साझेदारी’ जैसे ऐतिहासिक फैसलों पर मुहर लगी थी।
उद्देश्य: सप्लाई चेन को मजबूत करना और स्वच्छ तकनीक के क्षेत्र में साझा विकास।
अगला पड़ाव: मई की इस व्यस्त यात्रा के बाद, जून में प्रधानमंत्री मोदी G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस जाएंगे, जो वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है।
















