मध्य प्रदेश को ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का संकल्प: मुख्यमंत्री ने ग्वालियर सम्मेलन में किए बड़े ऐलान

ग्वालियर (एजेंसी)। ग्वालियर में आयोजित राज्य स्तरीय पशुपालक एवं दुग्ध उत्पादक सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश को देश का ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का विजन साझा किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पशुपालकों की आय बढ़ाने और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं।
पशुधन स्वास्थ्य के लिए नई सौगातें
ग्वालियर को पशुपालन के क्षेत्र में आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने कई विकास कार्यों की घोषणा की:
वेलनेस सेंटर: ग्वालियर में पशुओं के उपचार के लिए एक नया ‘केयर एंड वेलनेस सेंटर’ स्थापित किया जाएगा।
अस्पताल और उन्नयन: डबरा में एक नया पशु चिकित्सालय खोला जाएगा, साथ ही शहर के मौजूदा पशु स्वास्थ्य एवं उपचार केंद्र का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा।
गौ-एम्बुलेंस सेवा: बीमार पशुओं के त्वरित उपचार के लिए राज्य में गौ-एम्बुलेंस सेवा का संचालन किया जा रहा है, जो फोन कॉल पर सीधे पशुपालक के घर तक पहुंचती है।
किसानों और पशुपालकों की आय बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार पशुपालकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है:
दूध खरीद की गारंटी: सरकार पशुपालकों से सारा दूध खरीदेगी और उन्हें उसका सही दाम सुनिश्चित करेगी।
मुआवजे में चार गुना वृद्धि: विकास कार्यों के लिए यदि सरकार किसानों की जमीन का अधिग्रहण करती है, तो अब उन्हें पहले से चार गुना अधिक मुआवजा दिया जाएगा।
आहार सहायता में बढ़ोतरी: गौवंश के बेहतर पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये प्रति गौवंश कर दिया गया है।
अनुदान और सरकारी मदद: आत्मनिर्भरता की ओर
पशुपालकों को प्रोत्साहित करने और डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार नई योजनाएं लागू कर रही है:
सब्सिडी का लाभ: जो पशुपालक 25 गायों की गौशाला खोलेंगे, उन्हें सरकार प्रति यूनिट 10 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान करेगी।
वृंदावन ग्राम: राज्य के प्रत्येक ब्लॉक में ‘वृंदावन ग्राम’ विकसित किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण आजीविका और दुग्ध उत्पादन को नई गति मिल सके।
आधुनिक प्रदर्शनी: सम्मेलन में ‘वृंदावन ग्राम’ थीम पर एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें कामधेनु योजना, राष्ट्रीय पशुधन मिशन और दुग्ध उत्पाद तकनीक से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।
लक्ष्य: प्रदेश में दूध उत्पादन की रफ्तार को 50 लाख लीटर तक ले जाना
पशुपालन एवं डेयरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) लखन पटेल ने बताया कि डेयरी क्षेत्र के आधुनिकीकरण से राज्य में काफी सकारात्मक बदलाव आए हैं। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से राज्य में प्रतिदिन होने वाला दूध कलेक्शन 9 लाख लीटर से बढ़कर 12 लाख लीटर हो गया है, जिसे अब 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक ले जाने का लक्ष्य है।
कार्यक्रम के दौरान ग्वालियर की लाल टिपारा आदर्श गौशाला का विशेष उल्लेख किया गया, जो 10 हजार से अधिक गौवंश के साथ आत्मनिर्भरता का एक जीवंत उदाहरण पेश कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को लाभ वितरित किए और प्रदेश के सभी पशुपालकों से डेयरी क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी निभाकर राज्य को आर्थिक ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया।
















