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परमाणु मुद्दे पर ईरान का कड़ा रुख : ट्रंप की शर्त खारिज, देश से बाहर नहीं जाएगा यूरेनियम

तेहरान (एजेंसी)। अमेरिका और ईरान के बीच जारी परमाणु विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला मोजतबा मेनेई ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि देश का अत्यधिक समृद्ध (highly enriched) यूरेनियम भंडार किसी भी सूरत में विदेशी जमीन पर नहीं भेजा जाएगा। तेहरान के इस सख्त फैसले को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीतिक कोशिशों के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, जो इजरायल के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति स्थापित करने का दावा कर रहे थे।

क्या थी ट्रंप की योजना और क्यों बढ़ा तनाव?

अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को यह भरोसा दिलाया था कि किसी भी शांति समझौते के तहत ईरान को अपना सारा समृद्ध यूरेनियम देश से बाहर भेजने के लिए मजबूर किया जाएगा। ट्रंप ने इसे एक अनिवार्य शर्त के रूप में देखा था।

हालांकि, ईरानी प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सत्ता के गलियारों में इस बात पर पूरी सहमति बन चुकी है कि यूरेनियम को बाहर भेजना आत्मघाती साबित हो सकता है। ईरान का मानना है कि यदि उसने अपना परमाणु ईंधन बाहर भेजा, तो वह भविष्य में अमेरिका और इजरायल के संभावित सैन्य हमलों के सामने पूरी तरह असुरक्षित हो जाएगा।

नेतन्याहू की तीन शर्तें

दूसरी तरफ, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी अपना रुख बेहद कड़ा रखा है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक निम्नलिखित तीन मोर्चों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक युद्ध को पूरी तरह समाप्त नहीं माना जाएगा:

यूरेनियम का खात्मा: ईरान की धरती से समृद्ध यूरेनियम को पूरी तरह हटाना।

प्रॉक्सी मिलिशिया: क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों और मिलिशिया को ईरान द्वारा दी जाने वाली सैन्य व आर्थिक मदद पर पूर्ण रोक।

मिसाइल कार्यक्रम: ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमताओं का पूरी तरह खात्मा।

भरोसे की कमी और युद्धविराम पर संकट

फरवरी 2026 में हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद से क्षेत्र में एक बेहद नाजुक और अस्थिर युद्धविराम लागू है। इस दौरान खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले और लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष की खबरें लगातार आती रही हैं।

ईरान को अंदेशा है कि यह युद्धविराम केवल अमेरिका की एक सोची-समझी चाल है, जिसका मकसद नए हमलों के लिए समय जुटाना है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने भी संकेत दिए हैं कि विरोधी खेमे की गतिविधियां किसी नए सैन्य अभियान की तैयारी की ओर इशारा कर रही हैं।

परमाणु वार्ता की वर्तमान स्थिति

ट्रंप की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान शांति समझौते की मेज पर नहीं आता है, तो वाशिंगटन दोबारा सैन्य कार्रवाई के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने कूटनीति को एक आखिरी मौका देने के लिए कुछ दिनों का समय देने की बात भी कही है।

विषय,ईरान का रुख,अमेरिका/इजरायल का रुख

प्राथमिकता,हमलों से सुरक्षा की स्थायी और विश्वसनीय गारंटी।,यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजना और संवर्धन रोकना।
परमाणु कार्यक्रम का उद्देश्य,चिकित्सा और अनुसंधान (Medical & Research) के लिए सीमित संवर्धन।,परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों को रोकना।

युद्ध शुरू होने से पहले, ईरान अपने 60% समृद्ध यूरेनियम के आधे हिस्से को बाहर भेजने के लिए राजी हो गया था। लेकिन अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगातार मिल रही धमकियों के बाद तेहरान ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं।

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल (जून 2025) हुए हमलों के वक्त ईरान के पास लगभग 440.9 किलोग्राम 60% तक समृद्ध यूरेनियम मौजूद था, जिसका बचा हुआ हिस्सा फिलहाल नतांज और इस्फहान के परमाणु केंद्रों में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है।

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