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ईंधन की मार : अब रोजमर्रा के सामानों पर भी महंगाई का संकट, जेब खाली होने को तैयार

नई दिल्ली (एजेंसी)। देश में लगातार महंगे होते जा रहे पेट्रोल और डीजल आम जनता के बजट को बिगाड़ने के लिए तैयार हैं। तेल कंपनियों द्वारा पिछले 10 दिनों के भीतर ईंधन की दरों में चार बार इजाफा किया जा चुका है, जिससे प्रति लीटर कीमतों में 7 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है। इस तेजी का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई पर पड़ने की आशंका है। माल ढुलाई महंगी होने की वजह से खाने-पीने की चीजों, राशन, जरूरी दवाओं और यात्रा की लागत में भारी उछाल आ सकता है।

10 दिनों में चार झटके: दिल्ली में पेट्रोल 100 के पार

काफी समय के अंतराल के बाद तेल कंपनियों ने 15 मई को ईंधन की कीमतों में पहली बार 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद 19 मई को 87 पैसे और 23 मई को 97 पैसे प्रति लीटर दाम और बढ़ाए गए। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के क्रम में 25 मई को चौथा झटका लगा, जब पेट्रोल में 2.61 रुपये और डीजल में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बड़ी वृद्धि की गई। इस बढ़ोतरी के बाद देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल का भाव 100 रुपये के आंकड़े को पार कर 102.12 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है, वहीं डीजल भी 95.20 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।

परिवहन लागत बढ़ने से हर चीज होगी महंगी

ईंधन की आसमान छूती कीमतों का असर केवल पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर बाजार को प्रभावित कर रहा है। हाल ही में अमूल और मदर डेयरी जैसी प्रमुख कंपनियों ने अपने पैकेज्ड दूध के दामों में बढ़ोतरी की है। इसके अलावा कई शहरों में ब्रेड महंगी हो गई है और टैक्सी चालकों ने भी किराया बढ़ाने की मांग शुरू कर दी है।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर ने इस बढ़ी हुई लागत का बोझ अब अन्य उद्योगों पर डालना शुरू कर दिया है। ‘ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ (AITWU) के मुताबिक, डीजल के बढ़ते दामों से देश भर में माल ढुलाई का संचालन मुश्किल होता जा रहा है। स्थिति से निपटने के लिए एसोसिएशन ने 20 मई से फ्यूल एडजस्टमेंट फैक्टर (FAF) लागू किया है, जिसके तहत डीजल महंगा होने पर माल ढुलाई की दरें अपने आप बढ़ जाएंगी।

आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा सीधा असर

परिवहन दरों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों, निर्माताओं, खुदरा विक्रेताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की लॉजिस्टिक्स लागत पर पड़ेगा। कंपनियां इस अतिरिक्त खर्च को खुद वहन करने के बजाय अंतिम रूप से ग्राहकों से ही वसूलेंगी, जिससे बाजार में मिलने वाला हर छोटा-बड़ा सामान महंगा हो जाएगा।

क्या है FAF का गणित?

ट्रक चलाने की कुल लागत में अकेले डीजल की हिस्सेदारी लगभग 65% होती है। एसोसिएशन के नए नियम के अनुसार, 15 मई के बेस प्राइस के बाद डीजल की कीमत में प्रति 1 रुपये की बढ़ोतरी होने पर माल ढुलाई का किराया 0.65% बढ़ जाएगा। उदाहरण के लिए, यदि डीजल 10 रुपये महंगा होता है, तो ट्रांसपोर्टेशन चार्ज में 6.5% की वृद्धि होगी।

कौन-कौन सी वस्तुएं हो सकती हैं महंगी?

माल ढुलाई बढ़ने से सबसे पहले और सबसे ज्यादा असर उन चीजों पर पड़ेगा जिनकी दैनिक रूप से आपूर्ति की जाती है। इनमें शामिल हैं:

खाद्य उत्पाद: फल, सब्जियां, दूध और अन्य डेयरी उत्पाद।

आवश्यक वस्तुएं: जीवन रक्षक दवाएं और रोजमर्रा के एफएमसीजी प्रोडक्ट्स।

अन्य क्षेत्र: कंस्ट्रक्शन मटेरियल (भवन निर्माण सामग्री), इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और ई-कॉमर्स साइट्स से होने वाली होम डिलीवरी।

कमजोर रुपया और महंगे तेल की दोहरी मार

भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होने से आयात (Import) महंगा हो गया है, क्योंकि भारत को आयातित सामानों के लिए अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ, घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दामों ने आग में घी का काम किया है। स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में आम जनता को महंगाई के एक बड़े दौर का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी शुरुआत दूध और आवश्यक वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी के साथ ऑलरेडी हो चुकी है।

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