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बंगाल की राजनीति में नया मोड़ : क्या टीएमसी में होगी बड़ी बगावत?

कोलकाता (एजेंसी)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद राज्य की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष के स्वर गहरे होते जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की कार्यप्रणाली से नाराज कई सांसद अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संपर्क में हैं। इनमें राज्यसभा सदस्यों की संख्या अधिक बताई जा रही है। हालांकि, भाजपा इस मामले में जल्दबाजी के मूड में नहीं है और बेहद सतर्कता से कदम आगे बढ़ा रही है।

नेतृत्व पर उठ रहे सवाल और अंदरूनी कलह

चुनावी शिकस्त के बाद टीएमसी के भीतर अभिषेक बनर्जी के फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। नाराज गुट का मानना है कि टिकट वितरण से लेकर सांगठनिक फैसलों में मनमानी की गई, जिसके कारण पार्टी को यह दिन देखना पड़ा।

असंतोष का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कई वरिष्ठ नेता और विधायक पार्टी की आंतरिक बैठकों से दूरी बना रहे हैं। बारासात की जिलाध्यक्ष काकोली घोष दस्तीदार समेत कई बड़े चेहरों की बेरुखी इस आंतरिक दरार को साफ बयां कर रही है। बदलते राजनीतिक हालातों के बीच इन नेताओं को अब टीएमसी में अपना भविष्य धुंधला नजर आ रहा है।

क्या ‘आप’ जैसी स्थिति दोहराई जाएगी?

संसद के ऊपरी सदन (राज्यसभा) में टीएमसी के पास वर्तमान में 13 और लोकसभा में 28 सदस्य हैं। हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) के कुछ राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने की तर्ज पर ही बंगाल में भी पासा पलटने की अटकलें हैं। चर्चा है कि टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं का एक बड़ा धड़ा पाला बदलने की तैयारी में है।

भाजपा की ‘वेट एंड वॉच’ नीति

इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के रणनीतिकार फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार, चुनाव परिणामों के तुरंत बाद अन्य दलों के नेताओं की एंट्री पर अस्थाई रोक लगा दी गई थी, ताकि जमीनी कार्यकर्ताओं में कोई गलत संदेश न जाए।

पार्टी सूत्रों का कहना है: “भाजपा अपने दरवाजे हर किसी के लिए नहीं खोलेगी। भविष्य में केवल साफ-सुथरी छवि वाले और कद्दावर नेताओं को ही शामिल करने पर विचार किया जा सकता है।”

उच्च सदन के समीकरणों पर नजर

माना जा रहा है कि भाजपा कुछ समय का इंतजार करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगी। वर्तमान में भाजपा राज्यसभा में पूर्ण बहुमत के आंकड़े के बेहद करीब है। अगर टीएमसी के कुछ सांसद पाला बदलते हैं, तो भाजपा उच्च सदन में अपने दम पर मजबूत स्थिति में आ जाएगी। आने वाले समय में महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के लिए यह संख्या बल भाजपा के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकता है।

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