छत्तीसगढ़

बस्तर में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने की कवायद : डिप्टी सीएम अरुण साव ने दिए कड़े निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जगदलपुर (बस्तर संभागीय मुख्यालय) में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। इस बैठक में उन्होंने लोक निर्माण (PWD), पीएचई (PHE) और नगरीय प्रशासन विभाग के कामकाज का लेखा-जोखा लिया। डिप्टी सीएम ने सभी पेंडिंग प्रोजेक्ट्स को तय वक्त के भीतर और तेजी से पूरा करने की बात कही। इस उच्च स्तरीय बैठक में बस्तर सांसद महेश कश्यप, महापौर संजय पांडे, कलेक्टर आकाश छिकारा और एसपी शलभ सिन्हा भी मौजूद रहे।

बैठक में उप मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए मुख्य दिशा-निर्देश नीचे दिए गए बिंदुओं के अनुसार हैं:

  1. कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में न हो देरी (लोक निर्माण विभाग)

अधिकारियों की जवाबदेही: श्री साव ने साफ किया कि अगर काम पूरा करने की डेडलाइन अधिकारियों ने तय की है, तो उसे समय पर पूरा कराने का जिम्मा भी उन्हीं का है। अधिकारी अपनी एडमिनिस्ट्रेटिव और टेक्निकल ताकतों का सही इस्तेमाल करें।

शुरुआती प्लानिंग: किसी भी प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्य योजना (DPR) बनाते वक्त ही जमीन अधिग्रहण, वन विभाग की मंजूरी, बिजली खंभों को हटाने और अतिक्रमण जैसी दिक्कतों को पहले ही सुलझा लिया जाए, ताकि बाद में काम न रुके।

  1. स्वच्छता दीदियों की सुरक्षा और मॉनसून की तैयारी (नगरीय प्रशासन)

स्वच्छता दीदियों की सेहत: डिप्टी सीएम ने अफसरों को निर्देश दिए कि वे स्वच्छता दीदियों से लगातार संपर्क में रहें, उनका हौसला बढ़ाएं और समय-समय पर उनके हेल्थ चेकअप के साथ-साथ उन्हें जरूरी सेफ्टी किट भी मुहैया कराएं।

बारिश से पहले सफाई: मॉनसून के आने से पहले शहर के सभी बड़े-छोटे नालों की सफाई मुस्तैदी से करने के निर्देश दिए गए हैं।

वॉटर हार्वेस्टिंग और वॉटर बॉडीज: जल संरक्षण के लिए प्राइवेट सेक्टर की मदद से रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने, तालाबों को साफ रखने और निकायों की कमाई (राजस्व) बढ़ाने के नए तरीके खोजने पर जोर दिया गया।

पीएम आवास योजना: जनप्रतिनिधियों और पार्षदों की मदद से शहरी प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की काउंसिलिंग करने को कहा गया है, ताकि जरूरतमंद लोग जल्द अपना मकान बना सकें।

  1. ‘जल जीवन मिशन’ और वाटर टैक्स पर फोकस (PHE विभाग)

नल-जल योजना का रखरखाव: जो पेयजल योजनाएं ग्राम पंचायतों को सौंपी जा चुकी हैं, उन्हें ठीक से चलाने के लिए ग्रामीणों को हर महीने वॉटर टैक्स (जल कर) देने के लिए जागरूक किया जाए। टैक्स मिलने से योजनाओं का मेंटेनेंस आसान होगा।

शुद्ध पेयजल: बरसात शुरू होने से पहले पानी की टंकियों की सफाई और वॉटर सोर्सेज का क्लोरीनेशन (कीटाणुशोधन) अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि लोग मौसमी बीमारियों से बच सकें।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button