छत्तीसगढ़

सरकारी विभागों पर बिजली बिल का बड़ा बोझ, स्मार्ट/प्रीपेड मीटर की योजना भी बेअसर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी महकमे बिजली बिल के भुगतान को लेकर बेपरवाह नजर आ रहे हैं। राज्य के विभिन्न विभागों पर पॉवर कंपनी का बकाया बढ़कर 3,200 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी नगरीय निकायों की है। बकाये की वसूली और व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार ने अगस्त महीने से सभी सरकारी कनेक्शनों को प्रीपेड करने और तीन महीने का अग्रिम (एडवांस) भुगतान लेने का फैसला किया था, लेकिन तीन महीने बीतने के बाद भी किसी विभाग ने इस पर अमल नहीं किया है।

मार्च से जुलाई तक और बढ़ा बकाये का आंकड़ा

राज्य गठन के बाद से ही सरकारी विभागों द्वारा समय पर बिजली बिल न भरने का सिलसिला जारी है। स्थिति यह है कि पॉवर कंपनी को बकाया चुकता कराने के लिए राज्य सरकार के बजट पर निर्भर रहना पड़ता है।

मार्च 2026 तक का बकाया: करीब ₹2,883 करोड़

मौजूदा स्थिति (जुलाई 2026): ₹3,200 करोड़ से अधिक

वित्तीय वर्ष 2025-26 की खपत: विभागों ने ₹1,252 करोड़ की बिजली का उपयोग किया, जिसके एवज में केवल ₹814 करोड़ का ही भुगतान किया गया। शेष ₹438 करोड़ बकाये में जुड़ गए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रत्येक विभाग के पास बिजली खर्च के लिए अलग से बजट आवंटित होता है, फिर भी भुगतान में लापरवाही बरती जाती है, क्योंकि इन विभागों के कनेक्शन आसानी से काटे नहीं जाते।

विभागवार मुख्य बकाया (मार्च 2026 की स्थिति में)
नीचे दिए गए आंकड़ों में अप्रैल से जुलाई तक की अवधि में और बढ़ोतरी हो चुकी है:

विभाग,बकाया राशि (करोड़ रुपये में)
नगरीय निकाय विभाग,”₹1,586″
पंचायत एवं ग्रामीण विकास,₹876
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE),₹109
स्कूल शिक्षा विभाग,₹80
चिकित्सा विभाग,₹31
आदिम जाति कल्याण,₹28
जल संसाधन विभाग,₹27
गृह विभाग,₹26
महिला एवं बाल विकास,₹26
आवास एवं पर्यावरण,₹23
लोक निर्माण (PWD),₹13
राजस्व विभाग,₹12

अन्य विभाग: वन विभाग (₹9 करोड़), उच्च शिक्षा (₹5.40 करोड़), कृषि (₹3.68 करोड़), सहकारिता (₹3.31 करोड़), कौशल विकास (₹3 करोड़), पशुपालन (₹3 करोड़), उद्यानिकी (₹2.64 करोड़), विधि एवं विधायी (₹2.42 करोड़), जेल (₹1.40 करोड़) और खेल विभाग (₹1.03 करोड़) समेत कई अन्य विभागों पर भी लाखों रुपये का बकाया शेष है।

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