BRICS समिट : दिल्ली आ रहे शी जिनपिंग, भारत-चीन के बीच ‘रेयर अर्थ मिनरल्स’ पर हो सकता है ऐतिहासिक करार

नई दिल्ली (एजेंसी)। नई दिल्ली में आयोजित होने वाले आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत के दौरे पर आ रहे हैं। इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान भारत और चीन के बीच दुर्लभ खनिजों (Rare Earth Minerals) की निर्बाध आपूर्ति को लेकर एक बड़े द्विपक्षीय समझौते पर सहमति बनने की प्रबल संभावना है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, 12 सितंबर की शाम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच उच्चस्तरीय वार्ता होगी, जिसमें इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा, 11 सितंबर को पीएम मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भी अहम द्विपक्षीय बातचीत तय है।
ताजा घटनाक्रम के प्रमुख बिंदु:
चीन से आपूर्ति पर सहमति: दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत दुर्लभ खनिजों पर चीन का नियंत्रण है। इस समझौते से भारत में इन critical संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जो उच्च तकनीक, रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं।
भारत का विशाल भंडार: वैश्विक स्तर पर दुर्लभ खनिजों के मामले में भारत 6 फीसदी हिस्सेदारी के साथ तीसरे स्थान पर है। भूगर्भीय सर्वेक्षणों में देश के 9 राज्यों (जैसे आंध्र प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तमिलनाडु) में लगभग 7.23 मिलियन टन खनिजों का पता चला है, जिन्हें ‘नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन’ के तहत निकाला जा रहा है।
रूस की तकनीकी मदद का प्रस्ताव: रूस ने भी भारत में इन जटिल खनिजों की खोज और खनन में अपनी विशेषज्ञता साझा करने की पेशकश की है। क्रेमलिन के अनुसार, राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस विषय पर भी विस्तृत चर्चा होगी।
क्या हैं दुर्लभ खनिज: 17 विशेष रासायनिक तत्वों के समूह को दुर्लभ खनिज कहा जाता है। इनमें स्कैंडियम, यिट्रियम, डिस्प्रोसियम और टेरबियम जैसे तत्व शामिल हैं, जिनका उपयोग स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहनों और रीन्यूएबल एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में व्यापक रूप से होता है।
















