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नेपाल में जल-प्रलय के बाद जिंदगी को पटरी पर लाने की कवायद : बच्चों की काउंसलिंग जारी, बुधवार से खुलेंगे 65 विद्यालय

मानसिक आघात से उबारने की पहल
नेपाल (एजेंसी)।
नेपाल में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदा के लगभग दो सप्ताह बाद भी नुवाकोट और रसुवा सहित आसपास के क्षेत्रों में बच्चे गहरे मानसिक आघात (ट्रॉमा) से जूझ रहे हैं। भयावह मंजर देख चुके कई बच्चे रात में अचानक डर कर उठ जाते हैं या बिल्कुल खामोश हो जाते हैं। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य टीमें प्रभावित बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित कर रही हैं।

स्कूलों की पुनर्वापसी और राहत कार्य

सामान्य जनजीवन बहाल करने के प्रयास के तहत नुवाकोट के बिदुर में बुधवार से 65 स्कूलों को पुन: संचालित करने की योजना है। बिदुर की उप-महापौर प्रभा बोगटी के अनुसार, बच्चों की कक्षाओं में सहज वापसी के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। आपदा के 13वें दिन पूरे देश में राष्ट्रीय शोक व्यक्त किया गया, जहां राष्ट्रध्वज आधा झुका रहा और मृतकों की याद में दीप जलाए गए।

सुरंग में बचाव अभियान और बढ़ती चुनौतियां

चिलिमे जलविद्युत परियोजना की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश के लिए ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ अर्नोल्ड डिक्स (जिन्होंने 2023 में भारत के सिलक्यारा सुरंग हादसे में मदद की थी) राहत कार्य में जुटे हैं। उनके अनुसार, नेपाल में एक साथ कई स्थानों पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलने के कारण यह स्थिति सिलक्यारा की तुलना में अधिक जटिल है।

आपदा के मुख्य आंकड़े:

हताहत: लगभग 1,380 लोगों की मृत्यु

लापता: 5,500 से अधिक नागरिक

सुरंग में फंसे होने की आशंका: करीब 121 लोग

भारतीय सीमावर्ती इलाकों में जापानी इंसेफेलाइटिस का बढ़ा खतरा

नेपाल की बाढ़ का असर भारत के पूर्वी तराई क्षेत्रों तक पहुंच गया है। महराजगंज, कुशीनगर और देवरिया जैसे सीमावर्ती जिलों में जमा बाढ़ के पानी और दलदल के कारण मादा क्यूलेक्स मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

जंतु विशेषज्ञ सुनील कुमार के अनुसार, गंडक नदी से सटे तराई क्षेत्रों में नमी के कारण जापानी इंसेफेलाइटिस का मुख्य वाहक (क्यूलेक्स मच्छर) तेजी से पनपता है। क्षेत्रों में लगातार बढ़ते हाई-ग्रेड फीवर के मामलों ने स्थानीय ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग से त्वरित जांच और रोकथाम के कड़े कदम उठाने की मांग की है।

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