बस्तर के अँधियारे को दूर करने की पहल : मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री से माँगे ₹435 करोड़

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम से भेंट कर बस्तर संभाग के कायाकल्प की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने ‘धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना’ के अंतर्गत बस्तर के 7 जिलों में स्थित 461 सुदूर और नक्सल प्रभावित रहे गाँवों तक ग्रिड आधारित बिजली पहुँचाने के लिए ₹435 करोड़ की विशेष केंद्रीय सहायता का आग्रह किया।
₹973 करोड़ का वृहद प्रोजेक्ट
मुख्यमंत्री साय ने केंद्रीय मंत्री को परियोजना का विस्तृत खाका सौंपते हुए बताया कि वर्षों से हिंसा और उग्रवाद की मार झेल चुके इन दूरस्थ अंचलों में बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है।
कुल परियोजना लागत: ₹973 करोड़
मांगी गई केंद्रीय मदद: ₹435 करोड़ (तीन वर्षों में किस्तों के रूप में)
वर्ष 2026-27: ₹85 करोड़
वर्ष 2027-28: ₹250 करोड़
वर्ष 2028-29: ₹100 करोड़
राज्य का अंश: शेष ₹538 करोड़ की राशि छत्तीसगढ़ सरकार खुद वहन करेगी।
अनुच्छेद 275(1) के तहत विशेष मंज़ूरी का आग्रह
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से अपील की कि इस प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत विशेष मामला मानते हुए जल्द से जल्द मंज़ूरी दी जाए। उन्होंने कहा कि बिजली पहुँचने से केवल घर ही रोशन नहीं होंगे, बल्कि स्थानीय आदिवासी समुदायों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्व-रोज़गार और लघु उद्योगों के नए अवसर पैदा होंगे।
केंद्र सरकार ने दिया पूर्ण सहयोग का भरोसा
केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि योजना का प्रस्ताव मिलते ही मंज़ूरी की कागज़ी प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बस्तर के विकास में बजट की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
“बस्तर अब भय और हिंसा से उबरकर विकास, विश्वास और नई संभावनाओं के दौर में प्रवेश कर रहा है। इन 461 गाँवों का विद्युतीकरण इस बदलाव की नींव साबित होगा।”
— विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री (छत्तीसगढ़)
















