UP चुनाव से पहले सवर्णों पर निशाना : बांकीपुर के नतीजों के बाद अखिलेश का नया दांव, PDA में ‘पंडित’ की दावेदारी

लखनऊ (एजेंसी)। बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है। इस चुनाव में भाजपा को मिली शिकस्त के पीछे सवर्ण, विशेषकर ब्राह्मण मतदाताओं की नाराजगी को एक बड़ी वजह माना जा रहा है। इस नए घटनाक्रम को देखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियों में बदलाव शुरू कर दिया है, जिसकी झलक लखनऊ में जनेश्वर मिश्र की जयंती के अवसर पर देखने को मिली।
कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने खुले तौर पर ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश की। उन्होंने अपने मुख्य राजनीतिक नारे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की नई व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें ‘P’ का अर्थ ‘पंडित’ भी है।
भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए सपा प्रमुख ने कई मुद्दे उठाए:
प्रशासनिक व राजनीतिक कार्रवाई पर सवाल: उन्होंने कानपुर के विकास दुबे कांड का जिक्र करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की और आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में एक विशेष वर्ग का उत्पीड़न हुआ है।
धार्मिक व सांस्कृतिक सम्मान: प्रयागराज में शंकराचार्य के बिना स्नान किए लौटने, बटुकों के साथ हुई घटना और विवादित फिल्मों का हवाला देते हुए उन्होंने इसे पूरे समाज के स्वाभिमान से जोड़ा।
प्रतिनिधित्व व विकास: पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने केवल सपा शासन में बने लोक भवन में उनकी प्रतिमा स्थापित की है। साथ ही, विधानसभा में माता प्रसाद पांडेय को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी देने को समाज के सम्मान के रूप में रेखांकित किया।
सत्ता पक्ष के चेहरों पर निशाना: अखिलेश ने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय का नाम लिए बिना संकेत दिया कि सत्ता में मौजूद सवर्ण चेहरे समाज के वास्तविक हितों की रक्षा करने में विफल रहे हैं।
2027 के आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा का यह नया रुख राज्य के जातीय और राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे सकता है।
















