भारत-चीन और पाक सीमाओं पर मजबूत होगी सैन्य सप्लाई चेन : सेना 2,500 लॉजिस्टिक्स ड्रोन की करेगी खरीदारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। रक्षा मंत्रालय ने चीन और पाकिस्तान की कठिन तथा दुर्गम सीमाओं पर तैनात जवानों तक जरूरी रसद और सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति को और तेज़ बनाने का फैसला किया है। इसके लिए भारतीय सेना 2,500 से अधिक लॉजिस्टिक्स ड्रोन हासिल करने जा रही है। इस निर्णय से सियाचिन ग्लेशियर, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले अग्रिम इलाकों में तैनात सैनिकों को राशन, हथियार, गोला-बारूद और चिकित्सा सहायता बिना किसी देरी के पहुंचाई जा सकेगी।
तीन विभिन्न श्रेणियों में होगी तैनाती
भारतीय सेना ने इस खरीद प्रक्रिया को शुरू करते हुए एक ‘रिक्वेस्ट फॉर इन्फॉर्मेशन’ (RFI) जारी किया है। इन ड्रोन को अलग-अलग भौगोलिक ऊंचाइयों के हिसाब से तीन वर्गों में विभाजित किया गया है:
6,000 फीट तक की ऊंचाई वाले क्षेत्र
6,000 से 12,000 फीट तक के क्षेत्र
12,000 से 20,000 फीट तक के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र
उच्चतम श्रेणी वाले ड्रोन को लगभग 19,000 फीट की ऊंचाई से उड़ान भरने (टेकऑफ) की क्षमता से लैस होना होगा। साथ ही, ये माइनस 30°C की अत्यधिक ठंड से लेकर 50°C तक के भीषण तापमान में भी काम करने में सक्षम होंगे।
आधुनिक नेविगेशन तकनीक से लैस होंगे ड्रोन
ये ड्रोन 10 से 20 किलोमीटर की एकतरफा दूरी तक रसद पहुंचाने में सक्षम होंगे। अत्याधुनिक सुविधाओं के तहत इनमें:
GPS और स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC (नैविक)
ऑब्स्टेकल अवॉइडेंस सेंसर (बाधा पहचान तकनीक)
दिन और रात में देखने वाले कैमरे
ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन शामिल रहेंगे।
सुरक्षा के लिहाज से इन्हें ऑटोमैटिक (स्वायत्त), मैनुअल तथा ‘रिटर्न-टू-होम’ मोड पर संचालित किया जा सकेगा।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के अनुभवों का परिणाम
सेना की यह पहल हालिया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन (ड्रोन हमला प्रणाली) के सफल उपयोग से मिले अनुभवों पर आधारित है। दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सिग्नल ब्लॉक करने के प्रयासों का मुकाबला करने के लिए इन नए ड्रोन में एंटी-जैमिंग और एंटी-स्पूफिंग तकनीक होना अनिवार्य किया गया है।
सामरिक लाभ और गति
कठिन पहाड़ी इलाकों में जहां पारंपरिक परिवहन माध्यमों का जाना लगभग असंभव होता है, वहां ये ड्रोन सुरक्षित और तेज़ विकल्प साबित होंगे। इनके इस्तेमाल से सैनिकों को जोखिम में डाले बिना, रात के अंधेरे और खराब मौसम में भी रसद आपूर्ति जारी रखी जा सकेगी। इससे सेना का रिस्पॉन्स टाइम बेहतर होगा और परिचालन लागत में भी कमी आएगी।
















