भारत-फ्रांस रक्षा डील : देश में ही तैयार होंगे 94 राफेल, 20 हजार फीट तक उड़ान भरने वाले ड्रोन भी खरीदेगा रक्षा मंत्रालय

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय वायुसेना और थलसेना की ताकत में इजाफा करने के लिए रक्षा मंत्रालय दो बड़े कदम उठाने जा रहा है। फ्रांस के तकनीकी सहयोग से भारत में ही 94 राफेल लड़ाकू विमानों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही, चीन और पाकिस्तान सीमा से सटे दुर्गम और अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात जवानों तक रसद व सुरक्षा सामग्री पहुंचाने के लिए 20,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम विशेष ड्रोन खरीदे जाएंगे।
3.25 लाख करोड़ रुपये का संभावित समझौता
रक्षा बेड़े के आधुनिकीकरण के तहत भारत कुल 114 नए राफेल जेट शामिल करने की योजना बना रहा है। इनमें से 94 जेट्स का निर्माण मेक इन इंडिया पहल के तहत देश में ही होगा। इस पूरी परियोजना के लिए दोनों देशों के बीच लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये का समझौता होने की संभावना है।
दुर्गम क्षेत्रों के लिए 2,500 से ज्यादा ड्रोन की तैयारी
सियाचिन ग्लेशियर, लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश जैसी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में तैनात सैनिकों को राशन, गोला-बारूद और जरूरी दवाइयां बिना किसी देरी के उपलब्ध कराने के लिए रक्षा मंत्रालय 2,500 से अधिक ड्रोन की खरीद कर रहा है।
ड्रोन की प्रमुख विशेषताएं:
तीन अलग-अलग श्रेणियां: ये ड्रोन 6,000 फीट, 12,000 फीट और 20,000 फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के आधार पर वर्गीकृत होंगे।
सख्त मौसम झेलने में सक्षम: यह तकनीक माइनस 30 डिग्री सेल्सियस की कड़ाके की ठंड से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक के अत्यधिक तापमान में आसानी से काम कर सकती है।
पेलोड और रेंज: प्रत्येक ड्रोन 10 से 20 किलोमीटर के दायरे में आवश्यक सामग्री और हथियार ले जाने में समर्थ होगा।
उन्नत तकनीक: सुरक्षित और सटीक संचालन के लिए इनमें जीपीएस (GPS), भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली ‘नाविक’ (NavIC), ऑब्सटेकल डिटेक्शन सेंसर (बाधा पहचान तंत्र) और नाइट-विजन कैमरों का इस्तेमाल किया जाएगा।
















