अब हर शुक्रवार रहेगा ‘नो-मीटिंग डे’, दफ्तरों से निकलकर सीधे जनता के बीच पहुंचेंगे नेता और अधिकारी

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश में प्रशासनिक कामकाज के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक नई पहल का ऐलान किया है। अब से राज्य में हर शुक्रवार को ‘नो-मीटिंग डे’ (बैठक-रहित दिन) के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों से लेकर सचिवालय और तहसील स्तर के अधिकारियों तक कोई भी दफ्तरी बैठक नहीं करेगा। इसके बजाय सभी जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर जनता की समस्याओं का निपटारा करेंगे।
मुख्यमंत्री ने इस योजना का शुभारंभ छिंदवाड़ा जिले से छह महीने तक चलने वाले ‘जन विश्वास अभियान’ के तहत किया। यह अभियान 7 जनवरी 2027 तक जारी रहेगा।
प्रशासन के चार मुख्य आधार
सीएम यादव ने बताया कि ‘जन विश्वास अभियान’ की नींव चार प्रमुख स्तंभों पर रखी गई है:
बातचीत
समाधान
संवेदनशीलता
सादगी
इस पहल का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली को केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित न रखकर अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनाना है।
छिंदवाड़ा से शुरुआत का कारण
प्रशासनिक गतिविधियों की शुरुआत के लिए छिंदवाड़ा को चुनने के पीछे इसका रणनीतिक महत्व है। महाराष्ट्र सीमा से सटा यह आदिवासी बहुल क्षेत्र विकास की व्यापक संभावनाओं से भरा हुआ है।
पदोन्नति, रोजगार और विकास पर जोर
अभियान की शुरुआत के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी:
पदोन्नति (Promotions): अकेले छिंदवाड़ा में 28 विभागों के 1,281 कर्मियों सहित पूरे प्रदेश में लाखों अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रमोशन दिया गया है।
नई भर्तियां: पुलिस और अन्य प्रमुख सरकारी विभागों में नई भर्ती प्रक्रियाएं शुरू की गई हैं।
विभिन्न वर्गों से सीधा संवाद: मुख्यमंत्री ने अपने दौरे में उद्योगपतियों, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों, होमस्टे संचालकों, पशुपालकों, मत्स्य पालकों, ‘ड्रोन दीदी’ पहल से जुड़ी महिलाओं, खिलाड़ियों और मेधावी छात्रों से मुलाकात कर सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर चर्चा की।
सरकार का मानना है कि ‘जन विश्वास अभियान’ महज एक प्रशासनिक योजना नहीं, बल्कि सुशासन की दिशा में एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव है।
















