छत्तीसगढ़ का नया आर्थिक विजन : ‘जॉब सीकर’ नहीं, अब ‘जॉब क्रिएटर’ बनेंगे राज्य के युवा

नई दिल्ली (एजेंसी)। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दो दिवसीय ‘वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ के दौरान अंतरराष्ट्रीय आर्थिक जगत की प्रमुख हस्तियों के सामने छत्तीसगढ़ का भावी विकास रोडमैप और निवेश की संभावनाएं प्रस्तुत कीं। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि राज्य अब केवल पारंपरिक खनिज व भारी उद्योगों तक सीमित न रहकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्टार्टअप्स, ग्रीन एनर्जी, सेमीकंडक्टर और आधुनिक विनिर्माण आधारित नई अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
ग्लोबल फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन जैसी दिग्गजों की उपस्थिति के बीच मुख्यमंत्री साय ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की नीतियों का मूल उद्देश्य केवल पूंजी निवेश जुटाना नहीं, बल्कि उसे सीधा युवाओं के रोजगार, उद्यमिता और कौशल विकास से जोड़ना है।
आर्थिक प्रगति और बजटीय प्राथमिकताएं
वर्ष 2025-26 के आर्थिक आंकड़ों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का ढांचा और नागरिक आय लगातार मजबूत हो रही है:
आर्थिक वृद्धि दर: राज्य की विकास दर 11.57 प्रतिशत दर्ज की गई, जिससे अर्थव्यवस्था का कुल आकार 6.31 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है।
प्रति व्यक्ति आय: राज्य में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 1,79,244 रुपये हो गई है।
बजटीय आवंटन: वित्तीय वर्ष 2026-27 के 1.72 लाख करोड़ रुपये के बजट में बुनियादी ढांचे, डिजिटल कनेक्टिविटी, रेल-सड़क नेटवर्क और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता दी गई है।
नीतिगत सुधार और 8 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव
राज्य में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बढ़ावा देने के लिए ‘औद्योगिक विकास नीति 2024-30’ और ‘सिंगल विंडो सिस्टम 2.0’ जैसे कदम उठाए गए हैं। बीते दो वर्षों में लगभग 450 प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।
नया ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम-2026’ लागू कर आठ विभागों की 43 सेवाओं को समयबद्ध किया गया है, जिसमें तय सीमा में निर्णय न होने पर स्वतः स्वीकृति (Deemed Approval) का प्रावधान है। इसका सीधा लाभ राज्य के लगभग 15 लाख एमएसएमई (MSME) उद्योगों को मिलने की उम्मीद है। इन सुधारों के फलस्वरूप प्रदेश को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
स्टार्टअप्स, एआई मिशन और फ्यूचर-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर
छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य राज्य के युवाओं को नौकरी ढूंढने वालों के बजाय रोजगार पैदा करने वाला बनाना है:
स्टार्टअप लक्ष्य: वर्ष 2030 तक राज्य में 5,000 नए स्टार्टअप विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती चरण के लिए नए उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक की सीड फंड सहायता दी जा रही है।
एआई शिक्षा व प्रशिक्षण: 6 लाख विद्यार्थियों और 1.5 लाख सरकारी कर्मचारियों को एआई (AI) प्रशिक्षण देने की योजना है। साथ ही 50 से अधिक नागरिक सेवाएं AI पर आधारित होंगी।
500 करोड़ का एआई मिशन: इसके तहत 100 एआई डेटा लैब, 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 300 से अधिक एआई स्टार्टअप्स को सहयोग दिया जाएगा।
नवा रायपुर डेटा सेंटर: नवा रायपुर में लगभग 1,000 करोड़ रुपये की लागत से एआई डेटा सेंटर पार्क तैयार किया जा रहा है।
बस्तर का बदलाव और स्थानीय अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण
सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद अब बस्तर को छत्तीसगढ़ की नई अर्थव्यवस्था के प्रमुख केंद्र के रूप में उभारा जा रहा है:
आजीविका योजना: बस्तर सहित वनांचल क्षेत्रों के 10 लाख परिवारों की आय बढ़ाने के लिए 4,824 करोड़ रुपये की योजना पर काम जारी है।
कनेक्टिविटी व बुनियादी ढांचा: 3,513 करोड़ रुपये की जगदलपुर-रावघाट रेल परियोजना से क्षेत्रीय व्यापार को गति मिलेगी। इसके अलावा 421 बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है और 34 लाख से अधिक नागरिकों के डिजिटल हेल्थ प्रोफाइल तैयार किए गए हैं।
वैल्यू एडिशन पर जोर: लघु वनोपज, मिलेट्स और कृषि उत्पादों को सीधे बेचने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही प्रोसेसिंग (Value Addition) करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है ताकि ग्रामीणों को अधिकतम आर्थिक लाभ मिल सके।
पर्यटन को उद्योग का दर्जा: चित्रकोट, तीरथगढ़ और कांगेर घाटी जैसे स्थलों को वैश्विक पर्यटन पटल पर लाने के लिए पर्यटन को उद्योग का दर्जा दिया गया है, जिससे निजी निवेश और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रीन एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर
पारंपरिक ऊर्जा में अग्रणी रहने के बाद अब छत्तीसगढ़ स्वच्छ ऊर्जा और उच्च तकनीक निर्माण की ओर बढ़ रहा है:
सौर ऊर्जा विस्तार: राज्य में 4,000 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा रही है। अब तक 90,000 से अधिक घर सोलर पावर से जुड़ चुके हैं और भिलाई में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट शुरू किया गया है।
स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग जोन: नवा रायपुर और राजनांदगांव में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, 142 एकड़ में फार्मा पार्क, टेक्सटाइल पार्क और राजनांदगांव में स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर प्रस्तावित हैं।
कोरबा में लिथियम खोज: कोरबा में लिथियम के भंडार मिलने से राज्य में उन्नत बैटरी निर्माण और न्यू-एनर्जी सेक्टर में निवेश के नए द्वार खुले हैं।
















