KPSC वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती मामला : भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) का बड़ा एक्शन

कर्नाटक (एजेंसी)। कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) द्वारा आयोजित वेटरिनरी ऑफिसर भर्ती परीक्षा में सामने आए कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले की जांच के सिलसिले में जांच एजेंसी ने कर्नाटक के कई शहरों और अहमदाबाद समेत कुल 21 अलग-अलग परिसरों पर व्यापक छापेमारी की है।
इस बड़ी कार्रवाई के तहत निम्नलिखित प्रमुख स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया गया:
KPSC और पूर्व अधिकारियों के परिसर: KPSC कार्यालय के अलावा आयोग के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार और सदस्य शांता होसमनी के निजी आवास।
निजी कंपनियां: परीक्षा की डिजिटल कॉपियों के मूल्यांकन से जुड़ी संस्था ‘एडुस्टेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड’ का कार्यालय।
संदिग्ध मध्यस्थ और अभ्यर्थी: मामले में सामने आए कथित बिचौलियों (अली और सिकंदर) के ठिकाने तथा चयन सूची में शामिल कुछ उम्मीदवारों के आवास।
यह पूरी कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत अंजाम दी जा रही है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि यह छापेमारी शिवशंकरप्पा साहूकार द्वारा अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के तुरंत बाद शुरू हुई है।
मामले की मुख्य वजह और विवाद
यह पूरा विवाद KPSC द्वारा निकाली गई 400 वेटरिनरी ऑफिसर पदों (342 नियमित और 58 बैकलॉग) की पारदर्शी प्रक्रिया पर लगे गंभीर आरोपों से जुड़ा है:
रिश्वतखोरी के आरोप: अभ्यर्थियों का दावा है कि अंतिम चयन सूची में नाम पक्का कराने के बदले कथित दलालों के जरिए 80 लाख रुपये तक की अवैध राशि मांगी गई।
प्रक्रिया में हेरफेर: उम्मीदवारों का आरोप है कि बिचौलियों ने चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का हक मारा गया और पूरी भर्ती में गड़बड़ी की गई।
















