अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल $100 के पार : सरकारी तेल कंपनियों पर बढ़ा वित्तीय दबाव, क्या महंगे होंगे पेट्रोल-डीजल?

नई दिल्ली (एजेंसी)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आए तीव्र उछाल ने भारतीय अर्थव्यवस्था और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की चिंता बढ़ा दी है। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को लांघ चुका है, जबकि भारतीय क्रूड बास्केट की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर दर्ज की गई है। सितंबर महीने का औसतन भाव भी 100 डॉलर से अधिक बना हुआ है। यद्यपि घरेलू स्तर पर ईंधन के दामों में तुरंत कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन कंपनियों पर लागत का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
तेल कंपनियों का घाटा (अंडर-रिकवरी): आईसीआरए (ICRA) की रिपोर्ट के अनुसार, महंगे क्रूड के आयात और स्थिर घरेलू दरों के कारण सरकारी कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग ₹5 प्रति लीटर तथा डीजल पर करीब ₹23 प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रसोई गैस पर भी असर: क्रूड और गैस की बढ़ती लागत के चलते घरेलू एलपीजी (LPG) सिलिंडर पर भी कंपनियों को प्रति सिलिंडर लगभग ₹200 की अंडर-रिकवरी झेलनी पड़ रही है।
तत्काल वृद्धि की संभावना कम: ईंधन की दरें केवल कच्चे तेल पर निर्भर न होकर सरकारी करों और नीतियों पर भी आधारित होती हैं। मई में पेट्रोल में ₹7.35 और डीजल में ₹7.53 प्रति लीटर की कुल वृद्धि के बाद से दरें स्थिर हैं, इसलिए तुरंत दाम बढ़ने की संभावना कम है। हालांकि, यदि क्रूड लंबे समय तक उच्च स्तर पर बना रहा तो मूल्य वृद्धि का दबाव बढ़ सकता है।
आयात बिल और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 90% क्रूड ऑयल आयात करता है। वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-जुलाई कालखंड में आयात मात्रा स्थिर रहने के बावजूद भारत का कच्चा तेल आयात बिल 56.5% बढ़कर 63.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यदि यही स्थिति रही, तो व्यापार घाटा बढ़ने के साथ रुपये और महंगाई पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
















