बस्तर में बाघों की सुरक्षा कड़ी : हर वनमंडल में बनेगा ‘टाइगर मूवमेंट सेल’, लोकेशन रहेगी गुप्त

जगदलपुर। बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, बस्तर और कोंडागांव क्षेत्रों में बीते एक वर्ष से बाघों की मौजूदगी लगातार दर्ज की जा रही है। वन विभाग अभी तक यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि यह एक ही बाघ का मूवमेंट है या अलग-अलग बाघों का। वहीं दूसरी ओर, इंद्रावती टाइगर रिजर्व में लगभग 7 से 8 बाघों के मौजूद होने का अनुमान है। बाघों की निरंतर आवाजाही को देखते हुए वन विभाग ने सभी संबंधित वनमंडलों में विशेष ‘टाइगर मूवमेंट सेल’ गठित करने का निर्णय लिया है।
निगरानी और सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित इस वन्यजीव की सुरक्षा के लिए बस्तर संभाग के सातों जिलों के वन अधिकारियों को कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अधिकारियों को केवल निगरानी तक सीमित न रहकर मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने, वैज्ञानिक आंकड़े जुटाने और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।
नोडल अधिकारी की नियुक्ति: टाइगर मूवमेंट सेल का संचालन संबंधित वनमंडलाधिकारी (DFO) की सीधी देखरेख में होगा, जबकि उप वनमंडलाधिकारी (SDO) इसके नोडल अफसर होंगे।
मैदानी अमले की जिम्मेदारी: रेंजरों और बीट गार्डों की जवाबदेही तय कर दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर इन्हें वन्यप्राणी वृत्त कार्यालय से तालमेल बनाकर काम करना होगा।
सुरक्षा कारणों से गुप्त रखी जाएगी लोकेशन
अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाघ की मौजूदगी या उसकी लोकेशन की जानकारी सार्वजनिक न की जाए। स्थान उजागर होने से लोगों की भारी भीड़ जमा हो सकती है, जिससे आम जनता और बाघ दोनों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
सूचना तंत्र को मजबूत करने और जानकारी देने वाले ग्रामीणों की पहचान गोपनीय रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, यदि बाघ किसी मवेशी को शिकार बनाता है, तो वन विभाग की टीम को तुरंत मौके पर पहुंचकर जांच करनी होगी और प्रमाणों के आधार पर पीड़ित को मुआवजा तुरंत भुगतान करना होगा।
















