कच्छ और सर क्रीक सीमा पर पाक सेना का जमावड़ा : गुजरात तट पर एम्फीबियस ताकत बढ़ा रहा पाकिस्तान

नई दिल्ली (एजेंसी)। गुजरात से लगी सर क्रीक और सिंध सीमा के दलदली इलाकों में पाकिस्तान अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत कर रहा है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना इस दुर्गम क्षेत्र में अपनी जल-थल (एम्फीबियस) युद्ध क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रही है। विशेष होवरक्राफ्ट की तैनाती, ड्रोन तकनीक का समावेश और त्रि-सेवा संयुक्त अभ्यासों के जरिए पाकिस्तान इस संवेदनशील जलीय सीमा को भारत के खिलाफ एक नए सामरिक मोर्चे में बदलने की फिराक में है।
पाकिस्तान की सैन्य गतिविधियों का ब्योरा
तटीय व संयुक्त अभ्यास: पाकिस्तान ने हाल ही में सर क्रीक के बैकवाटर में कई सुरक्षा अभ्यास आयोजित किए। इसमें तुर्की स्पेशल फोर्सेज और सऊदी अरब नौसेना के साथ कराची व सिंध तट पर युद्धक अभ्यास शामिल हैं। वहीं, कराची और पोर्ट कासिम पर बंदरगाह सुरक्षा को लेकर भी मॉक ड्रिल की गईं।
मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स: हाल ही में उत्तरी अरब सागर में आयोजित ‘सी-स्पार्क’ अभ्यास में पाकिस्तानी थल, नभ और जल सेना ने हिस्सा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ साइबर और ड्रोन प्रणालियों को एकीकृत करना था।
तकनीकी व बेड़े का विस्तार: मरीन बेड़े में तीन नए 2,400 टीडी होवरक्राफ्ट शामिल किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, ‘अबाबील’ अभ्यास के तहत मरीन कमांडोज और यूएवी (ड्रोन) के समन्वय से तट पर उतरने की रणनीतियों का परीक्षण किया गया।
रणनीतिक मंशा और भौगोलिक लाभ
कश्मीर और पंजाब के पारंपरिक सीमाओं से इतर, पाकिस्तान गुजरात के कच्छ और सर क्रीक क्षेत्र को एक वैकल्पिक मोर्चा बनाना चाहता है। बेहद जटिल और दलदली इलाका होने के कारण यहाँ भारी सैन्य वाहन निष्प्रभावी हो जाते हैं। पाकिस्तान इसी भौगोलिक चुनौती का फायदा उठाकर त्वरित घुसपैठ क्षमता विकसित करने और भारतीय सुरक्षा बलों का ध्यान बांटने की रणनीति पर काम कर रहा है।
भारत का करारा जवाब और एयरस्पेस बैन
भारत भी इस सीमा पर पूरी तरह सतर्क है। पूर्व में पाकिस्तानी ड्रोनों की घुसपैठ को नाकाम करने के बाद भारतीय सेना, नौसेना और तटरक्षक बल ने संयुक्त अभ्यास कर एंटी-ड्रोन सिस्टम, स्पीड बोट्स और अंडरवाटर ऑपरेशन्स की तैयारी को पुख्ता किया है।
इस बीच, पाकिस्तान विमानपत्तन प्राधिकरण (PAA) ने भारतीय उड़ानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) पर लगी रोक को 24 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दिया है।
















