दिल को दुरुस्त रखने का आसान तरीका : रोजाना के पुश-अप्स से कम हो सकता है कार्डिएक अरेस्ट का खतरा

नई दिल्ली (एजेंसी)। हाल के दिनों में 30 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं और अधेड़ों में अचानक हार्ट अटैक व कार्डिएक अरेस्ट की घटनाओं में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिल की बीमारियों के शुरुआती लक्षण अक्सर इतने मामूली होते हैं कि लोग इन्हें अनदेखा कर देते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकते हैं।
हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि इस खतरे से बचने के लिए महंगे जिम या भारी उपकरणों की आवश्यकता नहीं है। दैनिक जीवन में नियमित रूप से पुश-अप्स (Push-ups) जैसी बेसिक एक्सरसाइज को शामिल करके हृदय संबंधी जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
क्या कहती है रिसर्च?
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा ‘जामा नेटवर्क’ (JAMA Network) में प्रकाशित एक अध्ययन में पुश-अप्स और हार्ट हेल्थ के बीच सीधा संबंध पाया गया है।
अध्ययन के नतीजे: अग्निशामकों (Firefighters) पर किए गए इस शोध में देखा गया कि जो लोग 30 सेकंड में कम से कम 40 पुश-अप्स करने की क्षमता रखते थे, उनमें अगले 10 वर्षों में हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों का खतरा अन्य लोगों की तुलना में बेहद कम था।
हृदय के लिए क्यों कारगर है यह एक्सरसाइज?
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डायरेक्टर डॉ. विशाल रस्तोगी के अनुसार, पुश-अप्स एक बेहतरीन ‘मॉडरेट एक्सरसाइज’ है।
फुल-बॉडी वर्कआउट: पुश-अप्स के दौरान छाती, भुजाओं, पेट और पैरों की मांसपेशियां एक साथ सक्रिय होती हैं, जिससे शरीर की सहनशक्ति और लचीलापन बढ़ता है।
ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण: यह एक्सरसाइज तनाव पैदा करने वाले हार्मोन्स को घटाती है, गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाती है और ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित रखती है।
हार्ट की क्षमता में सुधार: नियमित पुश-अप्स करने से दिल की दबाव सहने की क्षमता में सुधार होता है, जिससे ब्लड प्रेशर सामान्य बना रहता है।
एक्सरसाइज करते समय इन बातों का रखें ध्यान
डॉक्टरों का सुझाव है कि पुश-अप्स या कोई भी कठिन एक्सरसाइज शुरू करने से पहले कुछ सुरक्षा सावधानियां जरूर बरतें:
हार्ट रेट की निगरानी करें:
एक्सरसाइज के दौरान आपकी उम्र के हिसाब से हार्ट रेट नियंत्रित होना चाहिए। उदाहरण के लिए, 40 वर्ष की उम्र में एक्सरसाइज करते वक्त हार्ट रेट 180 से अधिक नहीं जाना चाहिए। यदि यह 180 पार करता है, तो तुरंत रुक जाएं।
वहीं, यदि वर्कआउट के दौरान हार्ट रेट 150-160 तक नहीं पहुंचता, तो इसका मतलब है कि व्यायाम का सही असर आपके दिल पर नहीं पड़ रहा है।
ट्रेडमिल टेस्ट (TMT): पुश-अप्स की दिनचर्या शुरू करने से पहले एक बार ट्रेडमिल टेस्ट करवा लेना बेहतर होता है, ताकि दिल की स्थिति का सही पता चल सके।
डॉक्टर से परामर्श: यदि एक्सरसाइज करते समय धड़कन असामान्य रूप से तेज हो या सीने में भारीपन महसूस हो, तो तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करें।
















