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कंधे की जकड़न और दर्द को न करें नजरअंदाज : यह ‘फ्रोजन शोल्डर’ का हो सकता है शुरुआती इशारा

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। कंधे में होने वाले दर्द और अकड़न को अक्सर लोग सामान्य समझकर टाल देते हैं, लेकिन यह ‘फ्रोजन शोल्डर’ (चिकित्सकीय भाषा में एडहेसिव कैप्सुलिटिस) का शुरुआती लक्षण हो सकता है। यह बीमारी धीरे-धीरे पनपती है और समय के साथ बढ़ती जाती है। अगर शुरुआती चरण में ही इस पर ध्यान न दिया जाए, तो आगे चलकर हाथ हिलाना-डुलना भी मुश्किल हो जाता है।

क्या होता है फ्रोजन शोल्डर?

हमारे कंधे के जोड़ के चारों ओर ऊतकों का एक आवरण (कैप्सूल) होता है। जब यह कैप्सूल मोटा, सख्त और सूज जाता है, तो कंधे की गति सीमित हो जाती है। विशेष रूप से किसी चोट, फ्रैक्चर या सर्जरी के बाद जब हाथ काफी समय तक एक ही स्थिति में रहता है, तब इस समस्या के पनपने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

किस उम्र में और किसे है ज्यादा खतरा?

उम्र और लिंग: यह समस्या आमतौर पर 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में देखी जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इसकी चपेट में अधिक आती हैं।

मधुमेह (Diabetes): शुगर के रोगियों में फ्रोजन शोल्डर होने का जोखिम 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ जाता है, और यह दोनों कंधों को प्रभावित कर सकता है।

गतिहीनता (Immobility): स्ट्रोक, रोटेटर कफ की चोट, या बांह टूटने के कारण कंधे का मूवमेंट बंद रहने से यह स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

बीमारी के तीन मुख्य चरण

फ्रीजिंग चरण (Freezing Stage): कंधे को किसी भी दिशा में घुमाने पर तेज दर्द होता है और गति धीरे-धीरे सीमित होने लगती है।

फ्रोजन चरण (Frozen Stage): इस दौरान दर्द में थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन जकड़न इतनी बढ़ जाती है कि दैनिक कार्य करना बेहद कठिन हो जाता है।

थॉइंग चरण (Thawing Stage): इस अंतिम अवस्था में कंधे की कार्यक्षमता और मूवमेंट में धीरे-धीरे सुधार होना शुरू होता है।

बचाव और देखभाल

फ्रोजन शोल्डर से उबरने में काफी समय लगता है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका यह है कि किसी भी चोट या सर्जरी के बाद डॉक्टर की सलाह से कंधे का हल्का-फुल्का मूवमेंट और फिजियोथेरेपी जारी रखें, ताकि जोड़ में जकड़न न आ सके।

अस्वीकरण: यह सामग्री केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के सटीक निदान और उपचार के लिए चिकित्सक या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

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