ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- खाड़ी में इंटरनेट केबल को बनाएंगे निशाना

नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई है। इसके जवाब में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने फिर हमला किया, तो ईरान खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बना सकता है। इससे इंटरनेट सेवाओं, वित्तीय लेनदेन और ऑनलाइन कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है।
ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकता है। यह नाम 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान से जुड़ा है। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित सैन्य कार्रवाई कब और किस तरह की होगी।
युद्ध कब तक चलेगा, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। इस बीच ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और नए हमलों से क्षेत्रीय स्थिरता तथा वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ रही है। अमेरिका और इजराइल के हमलों में हजारों लोगों की मौत और लाखों लोगों के विस्थापित होने की बात कही गई है।
ट्रंप बोले- अमेरिका युद्ध जल्दी खत्म कर सकता है
ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका युद्ध को बहुत जल्दी समाप्त कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या इसे तत्काल खत्म करना चाहिए या धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए।
ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के पास युद्ध समाप्त करने की क्षमता है, लेकिन फैसला यह करना है कि इसे अभी खत्म किया जाए या इसके धीरे-धीरे समाप्त होने का इंतजार किया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही जारी है और अमेरिका को वह सब मिल रहा है, जो वह चाहता है।
ट्रंप इससे पहले भी युद्ध के लक्ष्य और उसकी समयसीमा को लेकर अलग-अलग बयान दे चुके हैं। इसी महीने उन्होंने कहा था कि अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों में अमेरिकी संसद पर नियंत्रण को लेकर फैसला होना है।
तुर्की और फ्रांस ने नई सैन्य कार्रवाई के खिलाफ चेताया
ईरान पर दोबारा हमले की आशंका के बीच कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है। शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई।
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि ईरान पर नया हमला तनाव को और बढ़ा सकता है और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष खत्म करने का रास्ता बातचीत और कूटनीति से ही निकल सकता है। नीतियांदेखें
फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी नई सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से किसी को फायदा नहीं होगा। इसका तेल की कीमतों पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सके।
ईरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे की केबल भी नहीं रहेंगी सुरक्षित
एक रिपोर्ट के मुताबिक, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बनाने की योजना तैयार की है। अधिकारियों के अनुसार, अगर ईरान पर दोबारा हमला होता है, तो सैन्य ठिकानों के साथ समुद्र के नीचे मौजूद संचार नेटवर्क भी निशाने पर आ सकते हैं।
एक अधिकारी ने दावा किया कि ईरान की इन केबल तक पहुंच है और वह उन्हें नष्ट कर सकता है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी कहा है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब खाड़ी क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय डिजिटल कनेक्टिविटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
केबल कटने से इंटरनेट और वित्तीय सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं
समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल दुनिया के करीब 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक को पहुंचाती हैं। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा गुजरता है। इसके बावजूद, इस क्षेत्र में कई केबल क्षतिग्रस्त होने से इंटरनेट की गति धीमी पड़ सकती है और ऑनलाइन सेवाओं में बाधा आ सकती है।
इसका असर वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं पर भी पड़ सकता है। नुकसान कितना गंभीर होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक नेटवर्क पर कितनी तेजी से भेजा जा सकता है और उन नेटवर्क में अतिरिक्त क्षमता कितनी उपलब्ध है।
युद्ध के हालात में समुद्र के नीचे की केबल की मरम्मत करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। बीमा लागत बढ़ने और प्रभावित समुद्री क्षेत्र में मरम्मत के लिए अनुमति मिलने में देरी होने से बहाली का काम लंबा खिंच सकता है।
खाड़ी देशों के तकनीकी निवेश पर भी खतरा
खाड़ी के देश तेल पर अपनी निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बड़े केंद्र के रूप में उभरने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रहे हैं। इसी रणनीति के तहत अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के साथ उनके संबंध भी बढ़े हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ईरान के हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। बहरीन में भी उसकी एक सुविधा के पास बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा था।
हालांकि, इंटरनेट ट्रैफिक के लिए जमीन के रास्ते वैकल्पिक मार्ग भी उपलब्ध हैं। खाड़ी देशों की सरकारें और अमेरिकी तकनीकी कंपनियां नेटवर्क को अधिक मजबूत बनाने के लिए नए बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं।
माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक मध्य पूर्व में समुद्र के नीचे और जमीन के रास्ते कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना बनाई है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की स्थिति में अब खतरा केवल सैन्य ठिकानों और ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि क्षेत्र के डिजिटल नेटवर्क और तकनीकी निवेश पर भी इसका असर पड़ सकता है।
















