छत्तीसगढ़

कवर्धा में सहकारिता का नया अध्याय : 48 नई समितियों से किसानों की राह हुई आसान

कवर्धा। छत्तीसगढ़ में कृषि और सहकारिता के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात देते हुए 515 नई प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) का ऑनलाइन उद्घाटन किया। इस विस्तार के तहत कवर्धा जिले को भी 48 नई समितियां मिली हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सहकार से समृद्धि की ओर बढ़ता कदम

मुख्यमंत्री ने इस पहल को “सहकार से समृद्धि” के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

नेटवर्क का विस्तार: इन नई समितियों के गठन के बाद अब प्रदेश में कुल सहकारी समितियों की संख्या 2,573 हो गई है।

आधुनिक खेती: सरकार का उद्देश्य पारंपरिक खेती में आधुनिक तकनीक और सहकारिता का मेल कराकर किसानों की आय बढ़ाना है।

ग्रामीण विकास: समितियों के माध्यम से गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

भालुचुआ में विशेष कार्यक्रम: किसानों को मिलेंगी बहुउद्देश्यीय सुविधाएं

कवर्धा के भालुचुआ गांव में आयोजित स्थानीय कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश प्रवक्ता जसविंदर बग्गा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने किसानों को होने वाले प्रत्यक्ष लाभों के बारे में विस्तार से चर्चा की:

एक ही छत के नीचे सुविधाएं: अब ये समितियां केवल ऋण तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि बहुउद्देश्यीय केंद्रों के रूप में खाद और उन्नत बीज भी उपलब्ध कराएंगी।

धान खरीदी में सुगमता: भालुचुआ, तिलाई भाट और चंदनपुर जैसे गांवों के किसानों को अब धान बेचने के लिए दूर स्थित हरिनछपरा जाने की मजबूरी नहीं होगी। वे अपनी नजदीकी समिति में ही उपज बेच सकेंगे।

डिजिटल बैंकिंग: पुरानी 2,058 समितियों को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत कर दिया गया है। माइक्रो एटीएम की सुविधा से किसान अब अपने ही गांव में ₹20,000 तक की नकद निकासी कर सकेंगे।

आभार और उपस्थिति

जसविंदर बग्गा ने इस किसान-हितैषी निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे, जिनमें श्याम कोसले (हरिनछपरा सोसाइटी), सरपंच चंद्र दिवाकर, वरिष्ठ नागरिक काम दत्त गेंड्रे, दुलाखन गेंड्रे, आशाराम लहरे और हीरो सतनामी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण शामिल थे।

इस नई व्यवस्था से कवर्धा के किसानों में हर्ष का माहौल है, क्योंकि इससे न केवल उनका समय बचेगा बल्कि बिचौलियों पर निर्भरता भी कम होगी।

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