छत्तीसगढ़ में सुशासन का नया सवेरा : जन-समस्याओं का समाधान और सशक्तिकरण

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की ‘सुशासन तिहार 2026’ पहल प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रशासन अब कार्यालयों से निकलकर सीधे जनता के द्वार तक पहुँच रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य “विश्वास, विकास और त्वरित समाधान” के मंत्र को धरातल पर उतारना है, ताकि अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँच सके।
गाँव-गाँव पहुँच रहा प्रशासन
हाल ही में कोरबा जिले के पाली विकासखंड के ग्राम ईरफ में एक वृहद जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर की विशेषता यह रही कि जिला प्रशासन के आला अधिकारियों ने स्वयं मौजूद रहकर ग्रामीणों की मांगें सुनीं और उनके आवेदनों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की। यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता और प्रशासन के बीच बढ़ते भरोसे का उत्सव नजर आया।
लखनलाल की आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
इस शिविर ने ग्राम बड़े बांका के निवासी लखनलाल यादव के जीवन में आशा की एक नई किरण जगाई है। 28 वर्षीय लखनलाल ने साल 2023 में एक दुर्भाग्यपूर्ण सड़क दुर्घटना में अपने दोनों पैर खो दिए थे। बैसाखियों के सहारे जीवन काट रहे लखनलाल के लिए रोजमर्रा के काम भी एक बड़ी चुनौती बन गए थे।
सुशासन तिहार के सुखद परिणाम:
त्वरित सहायता: शिविर के दौरान लखनलाल की स्थिति को देखते हुए उन्हें तत्काल बैटरी चलित ट्राइसाइकिल प्रदान की गई।
आत्मनिर्भरता: अब लखनलाल को आवागमन के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
मुस्कान और आभार: ट्राइसाइकिल पाकर लखनलाल के चेहरे पर जो संतोष दिखा, वह इस अभियान की सफलता की कहानी खुद बयां कर रहा था।
“पहले मुझे हर कदम के लिए सहारे की जरूरत होती थी, लेकिन आज मिली इस मदद ने मुझे फिर से स्वतंत्र कर दिया है। सुशासन तिहार वाकई हम जैसे लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है।”
— लखनलाल यादव
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार की यह ‘डोर-स्टेप डिलीवरी’ व्यवस्था न केवल समस्याओं को सुलझा रही है, बल्कि प्रदेश में समावेशी विकास का एक नया अध्याय भी लिख रही है। ईरफ का यह शिविर इस बात का प्रमाण है कि जब शासन संवेदनशील हो, तो समाधान की राह आसान हो जाती है।
















