छत्तीसगढ़

कैनवास पर उकेरी गई बस्तर के विकास और संस्कृति की नई तस्वीर : ‘मुस्कुराता बस्तर’ कार्यशाला संपन्न

जगदलपुर। बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, मनोरम प्राकृतिक दृश्यों और वहाँ हो रहे सकारात्मक बदलावों को कला के जरिए उजागर करने के लिए जगदलपुर में ‘मुस्कुराता बस्तर’ नामक विशेष कार्टून कार्यशाला का आयोजन किया गया। जनसंपर्क विभाग और देश की एकमात्र मासिक कार्टून पत्रिका ‘कार्टून वॉच’ के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में 10 अलग-अलग स्कूलों के करीब 120 छात्र-छात्राओं ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

कला विचारों को व्यक्त करने का सशक्त माध्यम: केदार कश्यप

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि और प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कला के माध्यम से अपनी सोच को व्यक्त करना एक अनूठी क्षमता है। कार्टून और कैरिकेचर महज मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक संदेशों, प्रादेशिक संस्कृति और विकास की गाथा को जन-जन तक पहुँचाने का एक प्रभावशाली माध्यम भी हैं।

इस दौरान जगदलपुर के महापौर श्री संजय पांडेय, एमआईसी सदस्य श्री संग्राम सिंह सहित कई शिक्षक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। बस्तर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने भी कार्यशाला में शिरकत कर बच्चों का मनोबल बढ़ाया।

राष्ट्रीय कलाकारों ने सिखाए कला के गुर

कार्यशाला में देश के जाने-माने कलाकारों ने बच्चों का मार्गदर्शन किया:

लाइव डेमो: दिल्ली के वरिष्ठ कार्टूनिस्ट श्री माधव जोशी और पुणे के प्रसिद्ध कैरिकेचर विशेषज्ञ श्री शुभम जिंदे ने विद्यार्थियों को कार्टून और कैरिकेचर बनाने की बारीकियों व तकनीकों से रूबरू कराया।

भविष्य की संभावनाएँ: कलाकारों ने छात्रों को इस क्षेत्र में करियर के विकल्पों और सामाजिक बदलाव में कला की भूमिका की जानकारी दी।

विशेष कैरिकेचर: कार्यक्रम के दौरान कैरिकेचर कलाकार शुभम जिंदे ने वनमंत्री और महापौर के रेखाचित्र (कैरिकेचर) बनाकर उन्हें स्मृति चिह्न के रूप में भेंट किए।

उभरते बस्तर की खुशहाली को बच्चों ने रंगों से सजाया

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बस्तर जिस प्रकार विकास और नए अवसरों की दिशा में आगे बढ़ रहा है, उसी सकारात्मक माहौल को बच्चों ने अपने कैनवास पर उतारा। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, बस्तर का प्रसिद्ध दशहरा और स्थानीय आदिवासी संस्कृति जैसी अमूल्य धरोहरों को बच्चों ने अपनी रेखाओं और रंगों से जीवंत कर दिया।

‘कार्टून वॉच’ के संपादक त्र्यंबक शर्मा के अनुसार:

“इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी के भीतर छिपी रचनात्मकता को उभारना और स्थानीय युवाओं को बस्तर की सांस्कृतिक व प्राकृतिक पहचान से जोड़ना है। यह कार्यशाला बस्तर के सकारात्मक स्वरूप को वैश्विक स्तर पर पहुँचाने की एक अनूठी पहल है।”

कार्यशाला के समापन पर बच्चों के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया गया, जिसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।

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