मध्यप्रदेश

वर्ष-2027 तक देश को फाइलेरिया मुक्त बनाने समन्वित प्रयास करें : केंद्रीय मंत्री नड्डा

भोपाल (एजेंसी)। देश को हाथीपांव (फाइलेरिया) जैसी गंभीर बीमारी से निजात दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान 2026’ का वर्चुअल शुभारंभ किया। यह राष्ट्रव्यापी मुहिम 12 राज्यों के 124 जिलों में अगले दो हफ्तों तक युद्ध स्तर पर चलाई जाएगी।

समन्वित प्रयास ही सफलता की कुंजी

अभियान की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री नड्डा ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य केवल दवाओं के वितरण से पूरा नहीं होगा। उन्होंने जनप्रतिनिधियों—सांसदों, विधायकों और पंचायत सदस्यों से अपील की कि वे इस अभियान को एक जन-आंदोलन बनाएं। श्री नड्डा ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य कर्मियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पात्र नागरिक दवा का सेवन उनके सामने ही करें। भारत सरकार ने वर्ष 2027 तक देश से लसीका फाइलेरिया को पूरी तरह समाप्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

मध्य प्रदेश की तैयारी: 8 जिलों पर विशेष ध्यान

इस वर्चुअल बैठक में शामिल हुए मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने बताया कि राज्य के 8 जिलों (छतरपुर, पन्ना, उमरिया, मऊगंज, टीकमगढ़, निवाड़ी, शहडोल और भिंड) के 12 चयनित विकासखंडों में यह अभियान सघन रूप से चलाया जाएगा।

अभियान की कार्ययोजना (15 दिवसीय माइक्रोप्लान):

प्रथम 4 दिन: निर्धारित बूथों पर दवा पिलाई जाएगी।

अगले 7 दिन: स्वास्थ्य दल घर-घर जाकर दवा का सेवन सुनिश्चित करेंगे।

अंतिम 4 दिन: ‘मॉप-अप’ राउंड के जरिए छूटे हुए लोगों को कवर किया जाएगा।

श्री शुक्ल ने प्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि वे स्वयं दवा खाएं और अपने आस-पड़ोस को भी प्रेरित करें, ताकि मध्य प्रदेश को इस बीमारी से मुक्त किया जा सके।

फाइलेरिया: लक्षण और बचाव के उपाय

फाइलेरिया एक लाइलाज स्थिति की ओर ले जाने वाली बीमारी है, लेकिन समय पर दवा का सेवन इससे पूरी तरह बचा सकता है।

कारण: यह बीमारी ‘क्यूलेक्स’ मच्छर के काटने से फैलती है, जो गंदे पानी में पनपता है। इसके संक्रमण के पीछे ‘वुचरेरिया बेनक्रफ्टाई’ नामक कृमि (worm) होता है।

लक्षण: शुरुआत में बुखार और शरीर के अंगों (हाथ, पैर, अंडकोष या स्तन) में दर्द व सूजन। यदि समय पर उपचार न मिले, तो यह सूजन ‘हाथीपांव’ का रूप ले लेती है। लक्षण प्रकट होने में 8-10 साल भी लग सकते हैं।

निवारण (MDA): साल में एक बार दवा का सेवन ही इसका सबसे प्रभावी बचाव है।

किन्हें दवा लेनी है: 2 वर्ष से अधिक आयु के सभी स्वस्थ नागरिक।

किन्हें दवा नहीं लेनी है: 2 साल से छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति।

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