छत्तीसगढ़ में कृष्णमृग (ब्लैकबक) संरक्षण की गूंज अब दिल्ली तक : मुख्यमंत्री साय ने जताया आभार

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने प्रसिद्ध रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें अंक में छत्तीसगढ़ में काले हिरण (कृष्णमृग) के संरक्षण के लिए किए जा रहे सामुदायिक प्रयासों की सराहना की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे राज्य के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही यह पहचान प्रदेश के पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों के मनोबल को बढ़ाने वाली है।
जनभागीदारी से मिल रही है नई पहचान
रायपुर के भाटागांव में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने आम जनता के साथ प्रधानमंत्री का संबोधन सुना। इस दौरान उन्होंने निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
एकता का माध्यम: मुख्यमंत्री के अनुसार, ‘मन की बात’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के सुदूर क्षेत्रों में हो रहे नवाचारों और जमीनी स्तर के बदलावों को दुनिया के सामने लाने का एक सशक्त जरिया बन चुका है।
प्रेरणादायी नेतृत्व: प्रधानमंत्री मोदी एक अभिभावक की तरह समाज के हर वर्ग को सकारात्मकता और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता: राज्य में काले हिरणों के संरक्षण को मिली सराहना यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ जैव-विविधता और प्रकृति की रक्षा के लिए पूरी तरह समर्पित है।
आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री साय ने चर्चा के दौरान बांस के उपयोग और नवीकरणीय ऊर्जा पर भी अपनी बात रखी:
बांस से महिला सशक्तिकरण: बांस को वृक्षों की श्रेणी से हटाकर विशेष छूट देने के केंद्र सरकार के निर्णय से ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है।
पवन ऊर्जा की संभावनाएं: प्रधानमंत्री द्वारा पवन ऊर्जा पर दिए गए जोर का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ भी ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए इस दिशा में ठोस कदम उठा रहा है।
सामुदायिक सद्भाव की अनूठी मिसाल
इस कार्यक्रम की एक खास बात मुख्यमंत्री का सहज अंदाज रहा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह के साथ अपने घर से लाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का स्वाद साझा किया। उन्होंने कहा कि एक साथ भोजन करने से समाज में आपसी प्रेम, विश्वास और एकजुटता की भावना सुदृढ़ होती है।
इस गरिमामयी अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप सहित कई विधायक, जनप्रतिनिधि और भारी संख्या में नागरिक उपस्थित थे। यह आयोजन न केवल सरकारी उपलब्धियों का जश्न था, बल्कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प का संगम भी रहा।
















