छत्तीसगढ़

रायपुर में ‘चिंतन शिविर 3.0’ संपन्न, मुख्यमंत्री साय बोले- राज्य के विकास को मिलेगी नई गति

रायपुर। छत्तीसगढ़ को एक उन्नत और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के संकल्प के साथ रायपुर में आयोजित दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर 3.0’ का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उनकी कैबिनेट के मंत्रियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और देश के जाने-माने नीति व विषय विशेषज्ञों ने राज्य के चहुंमुखी विकास और प्रशासनिक सुधारों पर गहन विचार-मंथन किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि चिंतन शिविर केवल चर्चा का केंद्र नहीं है, बल्कि यह शासन व्यवस्था में बड़े बदलावों का जरिया बन चुका है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस सत्र से निकले सुझाव राज्य को प्रगति की नई राह पर ले जाएंगे और इन्हें जल्द ही सरकारी नीतियों में शामिल किया जाएगा।

विभिन्न सत्रों के मुख्य बिंदु और विशेषज्ञों के सुझाव:

पर्यटन को बढ़ावा: पर्यटन विशेषज्ञ और आईएएस अधिकारी सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन की असीम संभावनाएं हैं। केंद्र और राज्य के तालमेल से विशेषकर बस्तर संभाग को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जा सकता है।

जिला-केंद्रित विकास मॉडल: लोकसभा सांसद शशांक मणि त्रिपाठी ने ‘सबका प्रयास’ के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि विकास का असली केंद्र जिला होना चाहिए। उन्होंने हर जिले की स्थानीय आर्थिक क्षमता के आधार पर योजनाएं (District GDP) बनाने की वकालत की।

तकनीक का उपयोग: नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने प्रशासन में एआई (AI), ड्रोन, 5जी और डेटा-आधारित तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया, जिससे सरकारी सेवाएं अधिक पारदर्शी और सुलभ हो सकें।

कृषि में सुधार: कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के व्यावहारिक मॉडल पेश किए।

संवेदनशील नेतृत्व: उद्घाटन सत्र में आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नैतिक और संवेदनशील नेतृत्व को सुशासन की असली नींव बताया। वहीं समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने लोक प्रशासन और प्रभावी नीति क्रियान्वयन पर अपने विचार साझा किए।

धरातल पर दिख रहे हैं पिछले फैसलों के परिणाम

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले चिंतन शिविरों के सुझावों को सरकार ने गंभीरता से लागू किया है। इसके परिणामस्वरूप:

ई-ऑफिस प्रणाली: मंत्रालय में फाइलों का निपटारा अब तेजी और पारदर्शिता से हो रहा है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076: आम जनता की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए यह एक सशक्त माध्यम बना है।

सेवा सेतु पोर्टल: इसके जरिए 36 विभागों की 520 से अधिक सरकारी सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन घर बैठे मिल रही हैं।

‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के साथ कदम मिलाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार इस चिंतन शिविर के निष्कर्षों को प्रशासनिक सुधारों और अपनी भावी विकास योजनाओं का आधार बनाएगी।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button